सा विद्या या विमुक्तये
✍ वासुदेव प्रजापति जब हम अध्ययन-अनुसंधान विषय पर विचार करते हैं तो सबसे पहला विचारणीय बिन्दु प्रमाण व्यवस्था ध्यान में आता है। क्योंकि अध्ययन-अनुसंधान के…
✍ वासुदेव प्रजापति हिन्दू नववर्ष आदिकाल से मनाया जाने वाला सांस्कृतिक व ऐतिहासिक पर्व है। यह पर्व राष्ट्रीय बोध, हमारी प्राचीन वैज्ञानिकता एवं विश्व कल्याण…
✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश के नाम ‘भारत’ में ही ज्ञान समाया हुआ है। भारत एक ऐसा देश है जो अपना सम्पूर्ण व्यवहार ज्ञान के…
✍ वासुदेव प्रजापति किसी भी देश के वैचारिक क्षेत्र में जब अनवस्था होती है तब उसके सामाजिक जीवन में अव्यवस्थाएँ फैलती हैं। समाज में चिन्तन-मनन…
✍ वासुदेव प्रजापति गत अध्याय में हमने सामाजिक समरसता निर्माण करने के विषय में जाना। सामाजिक समरसता के समान ही दूसरा महत्वपूर्ण विषय साम्प्रदायिक सौहार्द…
✍ वासुदेव प्रजापति पूर्व अध्याय में हमने हीनताबोध और उसका स्वरूप क्या है? यह समझा और उससे मुक्त होने के लिए मनोवैज्ञानिक उपाय करने की…
✍ वासुदेव प्रजापति ‘ज्ञान की बात’ का आज से पाँचवें वर्ष में प्रवेश हो रहा है। अब तक हमने 96 ज्ञान की बातों का पठन…
✍ वासुदेव प्रजापति यूरोप ने पाँच सौ वर्ष पूर्व सम्पूर्ण विश्व का यूरोपीकरण करने का बीड़ा उठाया था। पूरे विश्व में छा जाने हेतु यूरोप…
✍ वासुदेव प्रजापति आजकल हमारे देश में साम्यवाद शब्द बड़ा प्रचलित है। यह साम्यवाद शब्द भी यूरोपीकरण का ही एक आयाम है। हमारे यहाँ अंग्रेजी…
✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों का भारत में आने का मुख्य उद्देश्य तो लूट करना ही था। वे यह लूट दीर्घकाल तक कर सकें इसलिए उसे…