वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास

 – रवि कुमार कहते हैं 1857 की क्रांति विफल हुई। क्या यह कहना सही है? नहीं! 1857 का महासंग्राम उसके बाद की पीढ़ियों को स्वतंत्रता…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति : प्रौढ़ शिक्षा

 – डॉ० रवीन्द्र नाथ तिवारी शिक्षा पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त कर, समाज और राष्ट्र को विकास के पथ पर अग्रसर एवं निरंतर बढ़ने हेतु…

विद्यालय का संस्कारक्षम वातावरण

 – राणा प्रताप सिंह जिसके लिए प्रत्येक माता-पिता व शिशु तृषित नेत्रों से निहारते रहते हैं। बालक के विकास में वैयक्तिक प्रतिभा (वंश परम्परा की…

शिशु शिक्षा 18 (नव दम्पति शिक्षण 3 – श्रेष्ठ संतान के लिए योग, संकल्प और प्रार्थना)

 – नम्रता दत्त श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति की आकांक्षा प्रत्येक माता पिता को होती है क्योंकि वे मरने के बाद भी अपनी संतान के रुप…

राष्ट्र जीवन में मकर संक्रांति का महत्व

 – डॉ. राम देशमुख मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्रियाकलापों का उसके परिवार, वह जिस समाज में रहता है वह समाज एवं प्रकृति के साथ घनिष्ठ़…

युग प्रवर्तक स्वामी विवेकानंद

 – अवनीश भटनागर युग नायक तथा युग प्रवर्तक सामान्य रूप से समाज जीवन में किसी भी श्रद्धास्पद विभूति के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्द…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 49 (शिक्षा का सांस्कृतिक स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा को जानने व समझने के लिए ज्ञान की बात नामक पाक्षिक स्तम्भ प्रारम्भ किया गया है। आज से ज्ञान की…

पॉकेट मनी – कैसे दें, कैसे लें

 – दिलीप वसंत बेतकेकर गांव का मेला, नाटक अथवा किसी विशेष त्यौहार के अवसर पर बच्चों के हाथ में कुछ पैसे देने के दिन अब…

भारतीय भाषाओं (मलयालम और मराठी) का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान – 3

मलयालम भाषा का योगदान १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम कई संदर्भों में अद्भुत है। यह वास्तव में भारत की जनता के विरोध की भावाभिव्यक्ति थी जिसमें…

पाती बिटिया के नाम-40 (दोष हमारा, श्रेय राम का)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! अनायास समाचार पत्रों में पढऩे को मिला कि मा. आचार्य विष्णुकांतजी शास्त्री अब हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल होंगे। पढ़ते…