सा विद्या या विमुक्तये
✍ नम्रता दत्त
बाल मनोविज्ञान के अनुसार बालक का 85 प्रतिशत विकास छः वर्ष की अवस्था से भी पूर्व हो जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दस्तावेज में भी इसका उल्लेख किया गया है और बाल्यावस्था में इस विकास का माध्यम अनुभव आधारित, क्रिया आधारित, खोज आधारित अथवा खेल खेल में बताया है। यही अनौपचारिक शिक्षा है।
वास्तव में तो सामान्यतः शिक्षा का अर्थ संस्कार के रूप में ही लिया जाता है। वे संस्कार जो सर्वे भवन्तुः सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम् के भाव को जागृत करें। इतने भारी भरकम शब्दों का भाव क्या बालक 6 वर्ष की अवस्था में समझ पाता है यदि नहीं तो मनोवैज्ञानिक ऐसा क्यों कहते हैं और यदि हां तो यह कैसे सम्भव है?
संस्कार कोई टॉफी नहीं, जो बालक को खिला दी जाए, वह कोई एनर्जी बुस्टर भी नहीं जो दूध में घोल कर पिला दिया जाए। फिर यह संस्कार 85 प्रतिशत तक बालक में कैसे विकसित होंगे। किन किन क्षेत्रों में उसे संस्कारित करें कि उसका व्यक्तित्व प्रतिभाशाली बने और वह सर्वे भवन्तुः सुखिनः की उक्ति को पूर्ण कर सके। आइए संक्षेप में विचार करते है।
संस्कार एवं चरित्र निर्माण के लिए चार पक्षों पर विचार करना होगा –
मैं अपनी एक परिचिता से मिलने गई, परिवार उस समय घरेलू सामान (राशन) खरीद कर लाया था और उसको यथा स्थान रखने की व्यवस्था कर रहा था। राशन का कुछ सामान (आटा और दालें आदि) अलग से निकाल कर उन्होंने एक बैग में भर दिया। मित्र बोली कि कल जब मैं मन्दिर जाऊंगी तो ले जाऊंगी। उसने कहा कि हर छह मास में वह ऐसा करती हैं। पहले गांव में रहते थे खेती का अनाज आता था तो सबसे पहले मन्दिर में भेजते थे। अब खेत तो बंटाई पर दे रखे हैं वहां से फसल लाने में खर्च अधिक लगता है, इसलिए हर छह मास में हम यहीं से अनाज खरीद कर मन्दिर में दे देते हैं। कुल की परम्परा तो बनी रहती है। मेरी सास करती थी तो मैं करती हूँ, मुझे देखकर ये बच्चे भी सीख जायेंगे, उम्मीद है कि आगे यह भी ऐसा ही करेंगे।
भारतीय जीवन दर्शन से जुङे ऐसे अनेक बिंदु हो सकते हैं। घर एवं विद्यालय में इनका वातावरण बनाना चाहिए। इन बिन्दुओं से जुङे गीत, कहानी, नाटक, कला, पपेट्स शो आदि भी किए जा सकते हैं। दीवारों की साज सज्जा भी इनके अनुरूप कर सकते हैं।
इस श्रृंखला के अगले सोपान में बालक की क्षमताओं के विकास के संदर्भ में चर्चा करेंगे।
(लेखिका शिशु शिक्षा विशेषज्ञ है और विद्या भारती शिशुवाटिका विभाग की अखिल भारतीय सह-संयोजिका है।)
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अति उत्तम
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