भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 72 (स्वायत्त शिक्षा भाग २)

 ✍वासुदेव प्रजापति स्वायत्त शिक्षा भाग १ में हमने यह जाना कि स्वायत्तता अंग्रेजी शब्द ओटोनोमी का अनुवाद है। इसलिए ओटोनोमी का अर्थ ही स्वायत्तता पर…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 71 (स्वायत्त शिक्षा भाग १)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा में स्वायत्तता और स्वतंत्रता की माँग अनेक शिक्षाविद और शैक्षिक संगठन समय-समय पर करते हुए सुनाई देते हैं, किन्तु स्वायत्तता प्राप्त…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 70 (बालक शिक्षा और बालिका शिक्षा – भाग २)

 – वासुदेव प्रजापति आज नारी स्वतंत्र अवश्य हुई है, परन्तु समान नहीं हुई है। उसे वही काम करने की चाह है, और उन्हीं कामों में…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 69 (बालक शिक्षा और बालिका शिक्षा- भाग १)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा क्षेत्र में आज सर्वत्र सहशिक्षा का बोलबाला है। बालक-बालिका ही नहीं अभिभावक भी सहशिक्षा के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 68 (औपचारिक-अनौपचारिक शिक्षा तंत्र)

 – वासुदेव प्रजापति आज शिक्षा क्षेत्र में औपचारिक और अनौपचारिक शब्दों का प्रयोग बहुत होता है, किन्तु इन दोनों शब्दों के सही अर्थ के बारे…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 67 (शिक्षित समाज)

 – वासुदेव प्रजापति जिस समाज में जितने अधिक शिक्षित व्यक्ति होते हैं, वह समाज उतना ही अधिक विकसित होता है। एक शिक्षित व्यक्ति अपनी भाषा…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 66 (शिक्षित व्यक्ति)

 – वासुदेव प्रजापति हमारे समाज में शिक्षित व्यक्ति का महत्त्व सदैव रहा है। यदि कोई व्यक्ति अशिक्षित है, तो समाज में उसे कभी मान-सम्मान प्राप्त…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 65 (शास्त्र की शिक्षा)

 –  वासुदेव प्रजापति जीवन में जितनी महत्त्वपूर्ण मन की शिक्षा और कर्म की शिक्षा है, उतनी ही महत्त्वपूर्ण शास्त्र की शिक्षा भी है। जहाँ मन…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 64 (कर्म की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति जहाँ मन की शिक्षा व्यक्ति को सज्जन बनाती है, वहीं कर्म की शिक्षा व्यक्ति को कर्मशील बनाती है। व्यक्ति सज्जन है परन्तु…

विभाजनकालीन भारत के साक्षी

 – वासुदेव प्रजापति यह  परिचय है “विभाजनकालीन भारत के साक्षी” पुस्तक का। भारत विभाजन के विषय पर वैसे तो अनेक पुस्तकें लिखी गईं हैं, किन्तु…