– वासुदेव प्रजापति आज की नई पीढ़ी भारत के स्वतंत्रता संग्राम से अनभिज्ञ है। उसने न जवाहरलाल नेहरु को देखा है न उसे सुभाषचन्द्र बोस…
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शालेय प्रार्थना सभा
– दिलीप बेतकेकर किसी शाला की प्रगति कम से कम समय में परखनी हो तो शाला की प्रार्थना सभा में उपस्थित रहें। शाला की प्रार्थना…
प्रेरणा के फूल
– गोपाल माहेश्वरी स्वदेशचंद्र जी आज सुबह से ही कुर्ता धोती पहनकर तैयार हो गए तो बेटे शिरीष ने पूछा “बाबूजी! आज कहाँ?” संघ की…
नए भारत का संकल्प
– गोपाल माहेश्वरी “अरी मीनू! अपने पिताजी को कहना गैस सिलेंडर बुक किया कि नहीं।” “क्या माँ! अभी नया सिलेंडर लगाए चार दिन भी नहीं…
छोटे का गांव
– रवि कुमार मरुभूमि में फलोदी के पास एक गांव में एक किसान रहता था। उसके दो पुत्र व एक पुत्री थी। किसान के पास…
देश के लिए जियें
– गोपाल माहेश्वरी अगले सप्ताह वार्षिक परीक्षाऍं आरंभ होने वाली थीं इसलिए मधुकर दिन रात पढ़ाई में जुटा हुआ था। सायं के छ: बजने वाले…
‘विद्यार्थियों’ के शिक्षकों की आवश्यकता
– दिलीप बेतकेकर ‘मुझे झटका लगा?’ ‘नहीं।’ ‘मैं संवेदनाहीन हुआ क्या?’ ‘बिलकुल नहीं।’ ‘तो फिर मैं ‘स्थित प्रज्ञ’ हूँ क्या?’ ‘नहीं जी! वह तो बहुत…
दादा जी का चमत्कार
– गोपाल माहेश्वरी स्मृति इन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए खूब परिश्रमपूर्वक पढ़ रही थी। उसने ठान लिया…
भारतीय शिक्षा के सामाजिक-आर्थिक आधार – भाग एक
डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता किसी देश की शिक्षा प्रणाली केवल उसकी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उत्कृष्टता का ही प्रतीक नहीं होती, अपितु वह उस देश की…
केसरिया सांझ
– गोपाल माहेश्वरी श्याम आज विद्यालय से लौटते हुए बहुत ही उदास था। उसका मन ही नहीं हो रहा था कि वह घर लौटे। वह…