भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 61 (विज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति आज का युग विज्ञान का युग माना जाता है। कुछ लोग तो आज के युग का देवता विज्ञान को ही मानते हैं।…

শিশুৰ মন, বুদ্ধি আৰু শিক্ষণত আহাৰ-বিহাৰৰ প্ৰভাৱ

  – ৰবি কুমাৰ পাঞ্জাবী ভাষাত এটা প্ৰবাদ আছে – “চবেৰে জে চাৰ বজে জগ্গে তাঁ দেন্ন বত্তী ঘন্টে দা হো জান্দা”। অৰ্থাৎ ৰাতিপুৱা চাৰি…

1857 के स्वातंत्र्य समर में दिल्ली लड़ती है – 3

 – रवि कुमार महेश्वर दयाल द्वारा लिखित ‘दिल्ली मेरी दिल्ली’ पुस्तक में वर्णित है कि इंद्रप्रस्थ यानी दिल्ली अपने जीवन काल में लगभग 300 बार…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 60 (सांस्कृतिक इतिहास)

 – वासुदेव प्रजापति हम इतिहास को राजकीय इतिहास के रूप में ही पढ़ाते हैं। सांस्कृतिक इतिहास भी होता है, इसका हमें भान ही नहीं है।…

बालक के मन, बुद्धि और शिक्षण पर आहार-विहार का प्रभाव

 – रवि कुमार पंजाबी में एक कहावत है- “सवेरे जे चार वजे जग्गे तां देन्न बत्ती घंटे दा हो जान्दा”। अर्थात यदि व्यक्ति प्रातः चार…

अध्ययन क्या है?

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अभ्यास ‘अभ्यास’, ‘अध्ययन’ अध्ययन। यह अभ्यास- अध्ययन क्या है? इन शब्दों का उच्चारण दिन रात होता है। शिक्षकों द्वारा तैयार उत्तर…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-59 (सांस्कृतिक अर्थशास्त्र, भाग-2)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक इस बिन्दु की स्पष्टता हुई होगी कि इकोनोमिक्स के सिद्धांतों पर चलने से सर्वजनहिताय व सर्वजनसुखाय का उद्देश्य सिद्ध नहीं…

1857 के स्वातंत्र्य समर में दिल्ली लड़ती है – 2

 – रवि कुमार जून से सितम्बर 1857 दिल्ली का संघर्ष शायद ही कोई जानता हो, शायद  ही किसी पाठ्य पुस्तक में पढ़ाया गया हो और…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 58 (सांस्कृतिक अर्थशास्त्र, भाग-1)

 – वासुदेव प्रजापति आज का युग आर्थिक युग है, यह सभी मानने लगे हैं। जीवन अर्थनिष्ठ बन गया है और अर्थ ने जीवन में केन्द्रवर्ती…

उत्तम स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है सम्यक निद्रा

 – रवि कुमार आज की भागदौड़ वाली आधुनिक जीवन शैली ने मानव स्वास्थ्य के जिन पहलुओं को प्रभावित किया है, उनमें आहार के साथ निद्रा…