देश के लिए जियें

– गोपाल माहेश्वरी अगले सप्ताह वार्षिक परीक्षाऍं आरंभ होने वाली थीं इसलिए मधुकर दिन रात पढ़ाई में जुटा हुआ था। सायं के छ: बजने वाले…

‘विद्यार्थियों’ के शिक्षकों की आवश्यकता

 – दिलीप बेतकेकर ‘मुझे झटका लगा?’ ‘नहीं।’ ‘मैं संवेदनाहीन हुआ क्या?’ ‘बिलकुल नहीं।’ ‘तो फिर मैं ‘स्थित प्रज्ञ’ हूँ क्या?’ ‘नहीं जी! वह तो बहुत…

दादा जी का चमत्कार       

           – गोपाल माहेश्वरी स्मृति इन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए खूब परिश्रमपूर्वक पढ़ रही थी। उसने ठान लिया…

भारतीय शिक्षा के सामाजिक-आर्थिक आधार – भाग एक

डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता किसी देश की शिक्षा प्रणाली केवल उसकी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उत्कृष्टता का ही प्रतीक नहीं होती, अपितु वह उस देश की…

केसरिया सांझ

– गोपाल माहेश्वरी श्याम आज विद्यालय से लौटते हुए बहुत ही उदास था। उसका मन ही नहीं हो रहा था कि वह घर लौटे। वह…

शिक्षकों, घर जाओ!

 – दिलीप बेतकेकर शीर्षक पढ़कर नाराज हो गये न आप? हमें ‘घर जाओ’ कहने वाले आप कौन? क्या अधिकार है आपको हमें घर भेजने का?…

शिक्षक साथियों, आओ हम आचार्य बनें

 – दिलीप बेतकेकर मैं अभी-अभी एक विद्यालय में शिक्षक पद पर पदस्थ हुआ था। नया ही था विद्यालय में। मेरे से एक-दो वर्ष पूर्व से…

आज की दुर्गा

– गोपाल माहेश्वरी नगर के अनेक चौराहों पर गरबों की धूम मची थी। रंगबिरंगी तेज जगमगाहट, भक्ति गीतों के पारंपरिक और फिल्मी धुनों वाले गरबा-गीतों…

2047 का विश्व गुरु भारत

– रवि कुमार भारत विश्व गुरु रहा है और 21वीं शताब्दी में पुनः उसी दिशा में अग्रसर है। 2012 के बाद राष्ट्र शक्ति के जनजागरण…

माँ का आँचल

– गोपाल माहेश्वरी देव आज शाला से थोड़ा विलंब से ही घर पहुँचा था। उसे जोरों की भूख लगी थी। घर में घुसते ही वह…