Ram katha in tribal area✍ रवि कुमार “राम आव्या जंगल मां, लक्ष्मण संग चाल्या। शबरी माय बेर लई, प्रेम थी थाळ भराल्या॥” “मीठा बेर चाखी-चाखी,…
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सौम्या की सखी
– गोपाल माहेश्वरी सौम्या आज बहुत उदास थी। आज उसके विद्यालय के छात्रावास में विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यालय का प्रतिनिधित्व करने हेतु चयन प्रक्रिया चल…
व्यक्तित्व विकास की भारतीय संकल्पना
-दिलीप बेतकेकर गोवा के एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कक्षा ग्यारह में अध्ययनरत एक विद्यार्थी को प्राचार्य ने घर वापिस जाने को कहा। कारण क्या…
अथातो प्रश्न जिज्ञासा
-लेख (मूल मराठी) दिलीप बसंत बेतकेकर -अनुवाद (हिन्दी) डॉ. रमेश चौगांवकर “समझे या नहीं?”, हैव् यू अण्डरस्टेण्ड? कक्षा में पढ़ाते समय ऐसे प्रश्न शिक्षक अपने…
वन्देमातरम् का 150वां जयन्ती वर्ष – भाग एक
– वासुदेव प्रजापति आज की नई पीढ़ी भारत के स्वतंत्रता संग्राम से अनभिज्ञ है। उसने न जवाहरलाल नेहरु को देखा है न उसे सुभाषचन्द्र बोस…
शालेय प्रार्थना सभा
– दिलीप बेतकेकर किसी शाला की प्रगति कम से कम समय में परखनी हो तो शाला की प्रार्थना सभा में उपस्थित रहें। शाला की प्रार्थना…
प्रेरणा के फूल
– गोपाल माहेश्वरी स्वदेशचंद्र जी आज सुबह से ही कुर्ता धोती पहनकर तैयार हो गए तो बेटे शिरीष ने पूछा “बाबूजी! आज कहाँ?” संघ की…
नए भारत का संकल्प
– गोपाल माहेश्वरी “अरी मीनू! अपने पिताजी को कहना गैस सिलेंडर बुक किया कि नहीं।” “क्या माँ! अभी नया सिलेंडर लगाए चार दिन भी नहीं…
छोटे का गांव
– रवि कुमार मरुभूमि में फलोदी के पास एक गांव में एक किसान रहता था। उसके दो पुत्र व एक पुत्री थी। किसान के पास…
देश के लिए जियें
– गोपाल माहेश्वरी अगले सप्ताह वार्षिक परीक्षाऍं आरंभ होने वाली थीं इसलिए मधुकर दिन रात पढ़ाई में जुटा हुआ था। सायं के छ: बजने वाले…