वन्देमातरम् का 150वां जयन्ती वर्ष – भाग एक

 – वासुदेव प्रजापति आज की नई पीढ़ी भारत के स्वतंत्रता संग्राम से अनभिज्ञ है। उसने न जवाहरलाल नेहरु को देखा है न उसे सुभाषचन्द्र बोस…

शालेय प्रार्थना सभा

 – दिलीप बेतकेकर किसी शाला की प्रगति कम से कम समय में परखनी हो तो शाला की प्रार्थना सभा में उपस्थित रहें। शाला की प्रार्थना…

प्रेरणा के फूल

– गोपाल माहेश्वरी स्वदेशचंद्र जी आज सुबह से ही कुर्ता धोती पहनकर तैयार हो गए तो बेटे शिरीष ने पूछा “बाबूजी! आज कहाँ?” संघ की…

नए भारत का संकल्प

 – गोपाल माहेश्वरी “अरी मीनू! अपने पिताजी को कहना गैस सिलेंडर बुक किया कि नहीं।” “क्या माँ! अभी नया सिलेंडर लगाए चार दिन भी नहीं…

छोटे का गांव

 – रवि कुमार मरुभूमि में फलोदी के पास एक गांव में एक किसान रहता था। उसके दो पुत्र व एक पुत्री थी। किसान के पास…

देश के लिए जियें

– गोपाल माहेश्वरी अगले सप्ताह वार्षिक परीक्षाऍं आरंभ होने वाली थीं इसलिए मधुकर दिन रात पढ़ाई में जुटा हुआ था। सायं के छ: बजने वाले…

‘विद्यार्थियों’ के शिक्षकों की आवश्यकता

 – दिलीप बेतकेकर ‘मुझे झटका लगा?’ ‘नहीं।’ ‘मैं संवेदनाहीन हुआ क्या?’ ‘बिलकुल नहीं।’ ‘तो फिर मैं ‘स्थित प्रज्ञ’ हूँ क्या?’ ‘नहीं जी! वह तो बहुत…

दादा जी का चमत्कार       

           – गोपाल माहेश्वरी स्मृति इन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए खूब परिश्रमपूर्वक पढ़ रही थी। उसने ठान लिया…

भारतीय शिक्षा के सामाजिक-आर्थिक आधार – भाग एक

डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता किसी देश की शिक्षा प्रणाली केवल उसकी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उत्कृष्टता का ही प्रतीक नहीं होती, अपितु वह उस देश की…

केसरिया सांझ

– गोपाल माहेश्वरी श्याम आज विद्यालय से लौटते हुए बहुत ही उदास था। उसका मन ही नहीं हो रहा था कि वह घर लौटे। वह…