ज्ञान की बात 47 (शिक्षा समाजनिष्ठ होती है)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा के प्रयोजनों के अन्तर्गत हमने उसके सांस्कृतिक प्रयोजन एवं राष्ट्रीय प्रयोजन को जाना। आज हम शिक्षा के सामाजिक प्रयोजन को जानेंगे।…

कैसे अंग्रेजों ने भारतीय वस्त्र उद्योग को तार-तार किया – आओ जाने-2

 – प्रशांत पोळ अंग्रेजों ने तय करके भारतीय वस्त्र उद्योग को नष्ट किया। वे इस उद्योग की महत्ता और इसके कारण भारत के वैश्विक महत्व…

कैसे अंग्रेजों ने भारतीय वस्त्र उद्योग को तार-तार किया – आओ जाने-1

 – प्रशांत पोळ हजार-दो हजार वर्ष पहले, जब भारत विश्व व्यापार में सिरमौर था, तब उस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा था – कपड़ा उद्योग।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 45 (भारतीय शिक्षा सत्य व धर्म सिखाती है)

– वासुदेव प्रजापति भारत में दी जाने वाली शिक्षा भारतीय नहीं है। यह शिक्षा विद्यार्थी को जीवन के लिए नहीं अपितु नौकरी के लिए तैयार…

कैसे अंग्रेजों ने ध्वस्त किया भारत का समृद्ध नौकायन उद्योग : आओ जाने – 2

 – प्रशांत पोळ रॉबर्ट बेरोन वोन हेन गेल्डर्न (१८८५-१९६८), इस लंबे चौड़े नाम वाले एक जाने-माने ऑस्ट्रियन एंथ्रोपोलॉजिस्ट हुए हैं। इनकी शिक्षा-दीक्षा विएना विश्वविद्यालय में…

कैसे अंग्रेजों ने ध्वस्त किया भारत का समृद्ध नौकायन उद्योग : आओ जाने – 1

 – प्रशांत पोळ प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अंगस मेडिसन ने अपने ग्रंथ ‘द हिस्ट्री ऑफ वर्ल्ड इकॉनोमिक्स’ में विश्व के व्यापार की परिस्थिति भिन्न-भिन्न कालखण्डों में…

ज्ञान की बात 44 (संस्कार – प्रक्रिया)

 – वासदेव प्रजापति संस्कार परम्परा के अन्तर्गत अब तक हमने मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में, सामाजिक व सांस्कृतिक सन्दर्भ में तथा पारम्परिक कर्मकांड के सन्दर्भ के संस्कारों…

ज्ञान की बात 43 (पारम्परिक सन्दर्भ में संस्कार)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में तथा सामाजिक व सांस्कृतिक सन्दर्भ में आने वाले संस्कारों के बारे में जानकारी प्राप्त की। आज…

कैसे अंग्रेजो ने ध्वस्त की भारत की विकसित चिकित्सा प्रणाली : आओ जाने – 4

 –   प्रशांत पोळ आरंभ से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में विकेन्द्रीकरण का बड़ा महत्व रखा गया था जो आधुनिक केन्द्रीकरण और अस्पताल व्यवस्था के बिल्कुल भिन्न…

विद्या भारती – व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण

 – वासुदेव प्रजापति भारत विश्व का प्रथम राष्ट्र है। विश्व के अनेक राष्ट्र जब पशुवत जीवन जीते थे, तब भारत ने ही उन्हें सभ्यता व…