सनातन संस्कृति के मर्यादा पुरुषोत्तम : श्रीराम

 – डॉ.कमल किशोर डुकलान ‘सरल’ बांसन्तिक नवरात्र और रामनवमी के पर्व का सनातन संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र से गहरा संबंध है।…

राष्ट्र गीत – वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्य श्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम् ।।1।।       शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्, फुल्ल–कुसुमित-द्रुमदल-शोभिनीम्, सुहासिनीं, सुमधुर-भाषिणीम्, सुखदां, वरदां, मातरम्। वन्दे मातरम् ।।2।। हे माता (भारतमाता)! मैं…

नोमोफोबिया – मोबाइल से दूर होने की बेचैनी

 – डॉ शिवानी कटारा हमारे हाथ में हर समय मौजूद स्मार्टफोन अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहा। वह हमारी अलार्म घड़ी है, पढ़ाई का…

विश्व-परिसर में योग-संस्कृति के अग्रदूत स्वामी विवेकानन्द

– संतोष कुमार दिवाकर जब सन् 1893 में स्वामी विवेकानंद शिकागो के विश्व धर्म महासभा (World’s Parliament of Religions) में सहस्रों श्रोताओं के समक्ष खड़े…

भारतीय शिक्षा के सामाजिक-आर्थिक आधार – भाग एक

डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता किसी देश की शिक्षा प्रणाली केवल उसकी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उत्कृष्टता का ही प्रतीक नहीं होती, अपितु वह उस देश की…

भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा – आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम

 – डॉ. शिवानी कटारा भारत एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र है, जहाँ शिक्षा के क्षेत्र में भाषा का प्रश्न सदैव महत्त्वपूर्ण रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति…

जनजातीय गौरव दिवस – धरती आबा बिरसा मुंडा

 – निखिल महेश्वरी भारत का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय आंदोलन एक दीर्घ और प्रेरणादायी यात्रा रही है, जिसमें हर आयु वर्ग के युवा, महिला, बुजुर्ग…

भारतीय-ज्ञान-परम्परायाम् बुद्धिः इत्यनया अभिप्रायः

 – चान्दकिरणः व्यवसायात्मिका     बुद्धिरेकेह    कुरुनन्दन। बहुशाखा ह्यानन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्॥ (अर्थात् हे अर्जुन! अस्मिन् लोके कर्मयोगे प्रवृत्तिशीला बुद्धिः एका एव। परन्तु अप्रवृत्तिशीलानाम् अस्थिर-चित्तानां जनानां बुद्ध्यस्तु बहुभेदाः अनन्ताश्च…

पंडित दीनदयाल उपाध्याय – व्यक्ति नहीं विचार दर्शन है

 – डॉ. सौरभ मालवीय “भारत में रहने वाला और इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन हैं। उनकी जीवन प्रणाली, कला,…

समाज में पनपतीं गाली गलौज प्रवृत्ति का तरुणों पर नकारात्मक प्रभाव और निवारण

– डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’ आजकल समाज में सभी उम्र के नर नारी में बात बात पर गाली गलौज करने की आदत बढ़ती ही जा…