– डॉ. इंदिरा दाँगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक शताब्दी पुराना एक ऐसा संगठन है जिसे देश सेवा, आपात स्थितियों में नागरिक-सहायता और सांस्कृतिक उत्थान के…
Category: लेख
2047 का विश्व गुरु भारत
– रवि कुमार भारत विश्व गुरु रहा है और 21वीं शताब्दी में पुनः उसी दिशा में अग्रसर है। 2012 के बाद राष्ट्र शक्ति के जनजागरण…
भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग तीन (अन्तःकरण व उसकी शिक्षा)
– ब्रज मोहन रामदेव करण अर्थात् उपकरण या साधना। ज्ञान प्राप्त करने के दो साधन है। 1. बाह्य करण 2. अन्तः करण। ज्ञानेन्द्रियां कर्मेन्द्रियां बाह्य…
हल्दी घाटी युद्ध विजय@450 वर्ष : अडिग प्रतिज्ञा, अजेय प्रताप
– प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा हल्दी घाटी युद्ध में अकबर की सेना संख्या में महाराणा प्रताप की सेना से चार गुना अधिक थी। मुगल सेना…
21वीं शताब्दी में मन की शिक्षा
– डॉ. किशनवीर सिंह शाक्य पूर्व आचार्य, विद्या भारती मन की शिक्षा का सामान्य अर्थ है कि शिक्षा में वे सभी आयाम हों जिससे विद्यार्थियों…
स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर
– प्रोफेसर रवीन्द्र नाथ तिवारी भारत अपनी स्वाधीनता के 79वें वर्ष के गौरवशाली पड़ाव पर पहुंच कर ‘अमृतकाल’ की यात्रा पर अग्रसर है। यह अमृतकाल…
भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग दो (उपनिषद् एवं शिक्षा)
– ब्रज मोहन रामदेव वैदिक वांग्मय के अनुसार वेद का अर्थ बोध या ज्ञान है। विद्वानों ने संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक तथा उपनिषद् इन चारों के…
दादरा-नगर हवेली सशत्र मुक्ति संग्राम की गौरव गाथा
– अवनीश भटनागर परकीय शासन के विरूद्ध सतत् संघर्ष तथा असंख्य बलिदानों के सुपरिणाम के रूप में भारत ने 15 अगस्त 1947 को स्वाधीनता का…
युगानुकूल परिवर्तन के लिए हम तत्पर हों
– डॉ. मोहन भागवत विद्या भारती एक शैक्षिक संगठन है जो एक निश्चित विचार के अनुसार विद्यालय संचालित करता है। शिक्षा के माध्यम से हम…
21वीं शताब्दी का भारत
-रवि कुमार 21वीं शताब्दी के भारत की चर्चा केवल भारत ही नहीं तो बल्कि विश्व में सर्वत्र है। 21वीं शताब्दी का भारत कैसा होगा, यदि…