सा विद्या या विमुक्तये
– रवि कुमार
भारत विश्व गुरु था। अमेरिका के बड़े चिंतक व इतिहासविद् हुए है – Will Durant. उन्होंने भारत के बारे में लिखा है – “India was the Motherland of our race, and Sanskrit, the mother of Europe’s languages, was the mother of our philosophy; mother through the Arabs, of much of our mathematics; mother, through the Buddha, of the ideals embodied in Christianity; mother, through the village community, of self-government and democracy. Mother India is in many ways the mother of us all.” (India Mother of Us All – Author Chaman Lal). ये शब्द भारत के विश्व गुरु होने की झलक दिखाते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंचम् सरसंघचालक माननीय सुदर्शन जी कहा करते थे कि सन 2012 और उसके बाद का समय भारत के लिए संधिकाल का समय है। 2012 के बाद भारत में राष्ट्र शक्ति का जनजागरण होगा और भारत विश्व के नेतृत्व की स्थिति की ओर आगे बढ़ेगा। अगर हम 2012 से 2025 का कालखंड देखते है तो माननीय सुदर्शन जी का कहा एकदम सही प्रतीत होता है।
परिवर्तन की दिशा
सन् 2013 में स्वामी विवेकानन्द के जन्म के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पूरे देशभर में विवेकानन्द सार्धशती के कार्यक्रमों ने हिंदुत्व के जनजागरण की एक लहर ला दी। सन् 2014 के लोकसभा चुनाव में हिंदुत्व आधारित विचारों को मानने वालों की सरकार बनी। 5 अगस्त 2019 को भारत राष्ट्र की एकता व अखंडता के लिए आवश्यक कदम उठाया गया और धारा 370 को हटा दिया गया। 9 नवम्बर 2019 को श्रीराम मंदिर अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया और 5 अगस्त 2020 को मन्दिर निर्माण का कार्य आरम्भ होकर 22 जनवरी 2024 को श्रीराम मंदिर का उद्घाटन हुआ। ये इस शताब्दी में भारत में राष्ट्र शक्ति शक्ति जनजागरण के बड़े चार घटनाक्रम है।
2047 के विश्व भारत के लिए आह्वान
सन् 2022-23 राष्ट्रीय स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव हम सबने मनाया। इसके बाद के 25 वर्ष यानी 2047 तक का कालखंड अमृतकाल घोषित हुआ। इस अमृतकाल के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘पंचप्रण’ बताएं – १. विरासत का गौरव २. गुलामी की मानसिकता से मुक्ति ३. विकसित भारत ४. एकता और एकजुटता ५. नागरिकों का कर्त्तव्य। इन ‘पंचप्रण’ को लेकर अगले 25 वर्ष अमृतकाल में कार्य होना है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत जी ने 2021 के विजयादशमी उद्बोधन में कहा कि अगर व्यक्ति के जीवन, परिवार, आचरण और स्वभाव, राष्ट्र एवं समाज को बदलना है तो शुरुआत स्वयं से करनी होगी। उन्होंने देश के प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, समाज एवं जीवन के प्रत्येक घटक में पांच परिवर्तनों की बात कही – १. सामाजिक समरसता युक्त जीवन, २. मूल्य आधारित समाज अर्थात कुटुंब प्रबोधन, ३. पर्यावरण केंद्रित जीवन शैली, ४. नागरिक कर्त्तव्यों का पालन एवं ५. स्वत्व के बोध के आधार पर नव युग निर्माण। इन पांच परिवर्तनों के आधार पर उन्होंने समाज परिवर्तन का आह्वान किया।
नया भारत समर्थ भारत
भारत अपने इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। 21वीं शताब्दी भारत की शताब्दी है। इस समय भारत सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है जबकि क्रय-शक्ति क्षमता की दृष्टि से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है। 2047 में भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था के साथ विकसित भारत ‘नया भारत समर्थ भारत’ बनने की दिशा में अग्रसर है। इस शताब्दी के एक चौथाई भाग में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक का विकास, आत्म निर्भरता व निरन्तर प्रगति की ओर सफलता पाई है –
विश्व गुरु भारत@2047 के लिए चुनौतियाँ व मार्ग
डॉ. कलाम ने पुस्तक “भारत 2020: ए विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम” की भूमिका के अंत में कहा – “विकसित भारत की कल्पना स्वप्न मात्र नहीं है। यह कुछ गिने-चुने भारतीयों की प्रेरणा मात्र भी नहीं होना चाहिए-यह हम सब भारतीयों का मिशन होना चाहिए, जिसे हमें पूर्ण करना है।”
विश्व गुरु की दृष्टि
विश्वगुरु बनने का मार्ग केवल भौतिक-आर्थिक विकास से नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों से प्रशस्त होता है। महर्षि अरविंद ने 15 अगस्त 1947 को आकाशवाणी पर कहा कि “मनुष्य की तरह हर राष्ट्र की एक नियति होती है। भारत की नियति आध्यात्मिक नियति है और विश्व को आध्यात्मिकता की रोशनी दिखाना भारत का कर्तव्य है।” भारत की भौतिक समृद्धि के साथ आध्यात्मिक और नैतिक उन्नति पर भी ध्यान देना होगा। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है – “हर देश के पास देने के लिए एक संदेश है, पूरा करने के लिए एक मिशन है, एक नियति तक पहुंचने के लिए। भारत का मिशन मानवता का मार्गदर्शन करना रहा है।” भारत की प्राचीन बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक का संयोजन आवश्यक होगा। विश्व गुरु भारत@2047 के लिए राष्ट्रीय संकल्प और तत्काल कार्य योजना बनाने की आवश्यकता है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर, युवा शक्ति और तकनीकी क्षमता से इस लक्ष्य की प्राप्ति संभव है।
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(लेखक विद्या भारती जोधपुर प्रान्त के संगठन मंत्री है।)
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