पं० हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य दर्शन

पं० हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का हिंदी साहित्य में अत्यंत विशिष्ट तथा सराहनीय योगदान रहा है। द्विवेदी जी निबंधकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। लगभग सभी…

बच्चों को अवसर देकर तो देखिये

 – राजेन्द्र बघेल आठवीं में पढ़ने वाली नम्रता कक्षा में एक दुबली पतली छात्रा थी। स्वभाव से बस संकोची भी थी। अतः मुश्किल से कोई…

शीतल पेय से दूर रहो, स्वस्थ रहो

 – दिलीप वसंत बेतकेकर सर्दी का मौसम समाप्त होकर जब गर्मी का मौसम शुरू हो रहा होता है, शीतल पेय दिखते ही मन ललचाता है…

बच्चों के लिए शाला का चयन

 – दिलीप वसंत बेतकेकर “प्रवेश प्रारम्भ! सीमित स्थान! प्रथम आने वाले को प्रथम प्रवेश! आज ही अपना नाम पंजीकृत कराएं!” किसी व्यवसाय या कम्पनी से…

परिवार हो समाज पोषक

 – दिलीप वसंत बेतकेकर औद्योगिक क्रांति के पश्चात जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अत्यधिक परिवर्तन हुए। परिवार प्रबन्धन भी अपवाद नहीं रहा। अनेक देशों में…

पॉकेट मनी – कैसे दें, कैसे लें

 – दिलीप वसंत बेतकेकर गांव का मेला, नाटक अथवा किसी विशेष त्यौहार के अवसर पर बच्चों के हाथ में कुछ पैसे देने के दिन अब…

सावधान, इस युगल से!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर कुछ समय पूर्व की ही घटना है… समाचारपत्र में छपी थी… एक युगल के सम्बन्ध में…! वह युगल लोगों को लुभावने,…

अद्वितीय गुरु – अतुलनीय शिष्य

– दिलीप वसंत बेतकेकर हजारों विद्यालय चलते हैं। लाखों शिक्षक पढ़ाते हैं। करोड़ों छात्र पढ़ते हैं, लेकिन परिणाम समान नहीं निकलते। विद्यालय अच्छे शिक्षा परिणाम…

पाती बिटिया के नाम-36 (बड़ा काम कैसे होता है? पूछा मेरे मन ने)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! आज एक सच्ची घटना सुनाता हूँ। उस दिन भोपाल जाने हेतु सुबह की पहली ट्रेन से निकलना तय हुआ।…

सुसंगति मिलती रहे

 – दिलीप बसंत बेतकेकर “तैयार हो गये क्या? जल्दी करो, देर हो रही है”, माँ ने अजय को चौथी बार याद दिलाते हुए कहा, परंतु…