प्रेरणा के फूल

– गोपाल माहेश्वरी स्वदेशचंद्र जी आज सुबह से ही कुर्ता धोती पहनकर तैयार हो गए तो बेटे शिरीष ने पूछा “बाबूजी! आज कहाँ?” संघ की…

नए भारत का संकल्प

 – गोपाल माहेश्वरी “अरी मीनू! अपने पिताजी को कहना गैस सिलेंडर बुक किया कि नहीं।” “क्या माँ! अभी नया सिलेंडर लगाए चार दिन भी नहीं…

देश के लिए जियें

– गोपाल माहेश्वरी अगले सप्ताह वार्षिक परीक्षाऍं आरंभ होने वाली थीं इसलिए मधुकर दिन रात पढ़ाई में जुटा हुआ था। सायं के छ: बजने वाले…

दादा जी का चमत्कार       

           – गोपाल माहेश्वरी स्मृति इन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए खूब परिश्रमपूर्वक पढ़ रही थी। उसने ठान लिया…

केसरिया सांझ

– गोपाल माहेश्वरी श्याम आज विद्यालय से लौटते हुए बहुत ही उदास था। उसका मन ही नहीं हो रहा था कि वह घर लौटे। वह…

आज की दुर्गा

– गोपाल माहेश्वरी नगर के अनेक चौराहों पर गरबों की धूम मची थी। रंगबिरंगी तेज जगमगाहट, भक्ति गीतों के पारंपरिक और फिल्मी धुनों वाले गरबा-गीतों…

माँ का आँचल

– गोपाल माहेश्वरी देव आज शाला से थोड़ा विलंब से ही घर पहुँचा था। उसे जोरों की भूख लगी थी। घर में घुसते ही वह…

रक्षा सूत्र

– गोपाल माहेश्वरी “जय जय श्रीमन्नारायण” कहते हुए परिवार के पुरोहित जी ने घर में प्रवेश किया। घर में एकदम शांति पसर गई। बच्चे बड़े…

शिवपूजा

– गोपाल माहेश्वरी श्रावण का महीना आरंभ हो चुका था। अच्छी-खासी वर्षा होने से गाँव के रास्ते कठिनाई से ही आने जाने योग्य रह गए…

अनूठा श्राद्ध

 – गोपाल माहेश्वरी विद्यार्थी पाठक सरस्वती विद्या मंदिर से आचार्य के रूप में सेवा निवृत्त हुए एक वर्ष ही बीता था कि एक दिन उनके…