पॉकेट मनी – कैसे दें, कैसे लें

 – दिलीप वसंत बेतकेकर गांव का मेला, नाटक अथवा किसी विशेष त्यौहार के अवसर पर बच्चों के हाथ में कुछ पैसे देने के दिन अब…

सावधान, इस युगल से!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर कुछ समय पूर्व की ही घटना है… समाचारपत्र में छपी थी… एक युगल के सम्बन्ध में…! वह युगल लोगों को लुभावने,…

अद्वितीय गुरु – अतुलनीय शिष्य

– दिलीप वसंत बेतकेकर हजारों विद्यालय चलते हैं। लाखों शिक्षक पढ़ाते हैं। करोड़ों छात्र पढ़ते हैं, लेकिन परिणाम समान नहीं निकलते। विद्यालय अच्छे शिक्षा परिणाम…

सुसंगति मिलती रहे

 – दिलीप बसंत बेतकेकर “तैयार हो गये क्या? जल्दी करो, देर हो रही है”, माँ ने अजय को चौथी बार याद दिलाते हुए कहा, परंतु…

अपयश को भी झेलो!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अपयश किसको अच्छा लगता है? किसी को भी नहीं। प्रत्येक व्यक्ति को सफलता और यश ही चाहिए परन्तु क्या वास्तव में…

पर्व और परीक्षा

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अपने देश मे वर्षभर अनेक पर्व-उत्सव बड़े उत्साह से, आनंदपूर्वक, धूम-धड़ाके से मनाये जाते हैं। दीपावली, गणेशोत्सव आदि की आतुरता के…

पालक, पालय और पैसा

– दिलीप वसंत बेतकेकर “Money is a terrible master but an excellent servant.” “पैसा मालिक के रूप में भयानक है, परन्तु नौकर के रूप में…

बच्चों की प्रगति पुस्तिका का अध्ययन

 – दिलीप वसंत बेतकेकर तिमाही परीक्षा के पश्चात प्रगति पुस्तक पर पालकों के हस्ताक्षर लेकर छठी कक्षा के विद्यार्थी, अपनी कक्षा अध्यापिका के पास, प्रगति…

बरसात हो सवालों की!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर “बिल्ली की आँखें रात्रि के समय क्यों चमकती हैं, पापा!” राजू ने समाचारपत्र पढ़ते कुर्सी पर बैठे हुए अपने पिताजी से…

पालकों के समक्ष चुनौतियाँ और सुअवसर

– दिलीप वसंत बेतकेकर विवाह हुआ, पारिवारिक जीवन प्रारंभ हुआ, माता-पिता की श्रेणी में आ गये, अब शिकवा-शिकायत का कोई अर्थ नहीं होता। दिन-ब-दिन पालकों…