सुसंगति मिलती रहे

 – दिलीप बसंत बेतकेकर “तैयार हो गये क्या? जल्दी करो, देर हो रही है”, माँ ने अजय को चौथी बार याद दिलाते हुए कहा, परंतु…

अपयश को भी झेलो!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अपयश किसको अच्छा लगता है? किसी को भी नहीं। प्रत्येक व्यक्ति को सफलता और यश ही चाहिए परन्तु क्या वास्तव में…

पर्व और परीक्षा

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अपने देश मे वर्षभर अनेक पर्व-उत्सव बड़े उत्साह से, आनंदपूर्वक, धूम-धड़ाके से मनाये जाते हैं। दीपावली, गणेशोत्सव आदि की आतुरता के…

पालक, पालय और पैसा

– दिलीप वसंत बेतकेकर “Money is a terrible master but an excellent servant.” “पैसा मालिक के रूप में भयानक है, परन्तु नौकर के रूप में…

बच्चों की प्रगति पुस्तिका का अध्ययन

 – दिलीप वसंत बेतकेकर तिमाही परीक्षा के पश्चात प्रगति पुस्तक पर पालकों के हस्ताक्षर लेकर छठी कक्षा के विद्यार्थी, अपनी कक्षा अध्यापिका के पास, प्रगति…

बरसात हो सवालों की!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर “बिल्ली की आँखें रात्रि के समय क्यों चमकती हैं, पापा!” राजू ने समाचारपत्र पढ़ते कुर्सी पर बैठे हुए अपने पिताजी से…

पालकों के समक्ष चुनौतियाँ और सुअवसर

– दिलीप वसंत बेतकेकर विवाह हुआ, पारिवारिक जीवन प्रारंभ हुआ, माता-पिता की श्रेणी में आ गये, अब शिकवा-शिकायत का कोई अर्थ नहीं होता। दिन-ब-दिन पालकों…

अपडेट और आउटडेट

 – दिलीप वसंत बेतकेकर ‘मोबाइल फोन किस-किसके पास है?’ ऐसा पूछने पर अनेक लोग प्रश्नार्थक मुद्रा से देखने लगे। सभी ने हाथ ऊपर किये। फिर…

तैयारी परीक्षा की…भावी जीवन की

 – दिलीप वसंत बेतकेकर “नमस्कार विद्यार्थी मित्रों, कैसी चल रही है तैयारी?” आपके पास पढ़ने के लिये शुरूआत करने के दिन से कितने दिन पहले…

धूम्रपान – पालकों का मज़ा, बालकों को सजा

 – दिलीप वसंत बेतकेकर “सिगरेट के एक सिरे पर होती है आग और दूसरे सिरे पर होता है एक मूर्ख” ऐसा कहा जाता है। सिगरेट…