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बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा-27 (21वीं सदी के अभिभावकों की शिक्षा)

 – रवि कुमार ‘अभिभावक’ शब्द पर विचार करते हैं तो ध्यान में आता है माता-पिता। एक शब्द और चलता है – ‘पाल्य या पालक’ अर्थात्…

शिशु शिक्षा-13 (दश वर्षाणि ताङयेत्)

 – नम्रता दत्त अभी तक शिशु शिक्षा की श्रृंखला में हमने लालयेत् पंचवर्षाणि की चर्चा की। शैशवास्था अर्थात् 0 से 05 वर्ष में शिशु शिक्षा…

मूल्यांकन प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन

 – डॉ. रवीन्द्र नाथ तिवारी वर्तमान में प्रचलित शिक्षा प्रणाली शिक्षकों द्वारा अध्यापन और विद्यार्थी को सीखने का पूरा प्रयास परीक्षाओं में अच्छे परिणाम प्राप्त…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 41 (मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में संस्कार)

 – वासुदेव प्रजापति हम संस्कारों को तीन सन्दर्भों में समझ सकते हैं। ये तीन सन्दर्भ हैं —। मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भ में पारम्परिक कर्मकांड…

Anniversary of NEP-2020: Vidya Bharati’s role – Way Forward

 – D. Ramakrishna Rao Vidya Bharathi has been putting it’s all out efforts and providing unstinted support to the government at policy preparation stage of…

अपयश को भी झेलो!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अपयश किसको अच्छा लगता है? किसी को भी नहीं। प्रत्येक व्यक्ति को सफलता और यश ही चाहिए परन्तु क्या वास्तव में…

पाती बिटिया के नाम-33 (गणपति बप्पा-मोरिया!!!)

– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! लो गणेश चतुर्थी आ पहुँची। गणपति बप्पा मोरिया के नारों के साथ एक बार फिर लगातार दस दिनों तक…

शिशु शिक्षा – 12- तीन से पांच वर्ष के शिशु का पालन पोषण (संगोपन)

 – नम्रता दत्त शिशु अवस्था (0 से 05 वर्ष) स्वाभाविक विकास की अवस्था है। यह विकास शिशु अपनी अन्तःप्रेरणा से ही करता है। इस अवस्था…

ज्ञान की बात 40 (संस्कार परम्परा)

 – वासुदेव प्रजापति संस्कार शब्द का प्रयोग सर्वत्र प्रचलित है। शिक्षा में संस्कारों का अभाव सर्वविदित है। विशेष रूप से शिशु शिक्षा में संस्कारों का…

कैसे अंग्रेजो ने ध्वस्त की भारत की विकसित चिकित्सा प्रणाली : आओ जाने – 2

 – प्रशांत पोळ भारतीय चिकित्सा प्रणाली, एक अत्यंत विकसित पद्धति थी। इन पश्चिम के डॉक्टर्स को जिसका अंदाज भी नहीं था, ऐसी ‘प्लास्टिक सर्जरी’ जैसी…