शिशु शिक्षा – 9 – गर्भावस्था-2

– नम्रता दत्त इस श्रृंखला के सोपान 8 में गर्भावस्था के चौथे मास तक दृष्टि डाली थी। अतः अब गर्भ की इससे आगे की यात्रा…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-33 (व्यक्तिगत विकास की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने समग्र विकास प्रतिमान के प्रथम भाग में पंचकोशात्मक विकास को समझा है। आज से हम दूसरा भाग परमेष्ठीगत विकास…

जगतगुरु आद्य शंकराचार्य का जीवन दर्शन

 – गिरीश जोशी शारदा पीठ कश्मीर स्थित भारतीय संस्कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं मुख्य केंद्र था, यहां पर मां सरस्वती का अत्यंत प्राचीन मंदिर हुआ…

1857 का राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम : एक विश्लेषण

– डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम पूरे भारत के नागरिकों के लिए उनके पूर्वजों के संघर्ष की वह कहानी है जिसका सारे विश्व…

भगवान महावीर का शिक्षा दर्शन

– ललित गर्ग भगवान महावीर की जन्म जयन्ती मनाते हुए हमें महावीर बनने की तैयारी करनी होगी, हम महावीर को केवल पूजें ही नहीं, बल्कि…

पाती बिटिया के नाम-24 (जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादऽपि गरियसी)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! केसर की क्यारी कश्मीर गोला बारूद की जहरीली हवा की चपेट में एक बार फिर आ गई। एक बार…

श्रीराम – सुशासन के प्रतीक महापुरुष

भगवान श्रीराम अविनाशी परमात्मा है जो सबके सृजनहार व पालनहार हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया में श्रीराम अत्यंत पूजनीय हैं और आदर्श पुरुष हैं।

राष्ट्र गुरु समर्थ रामदास स्वामी

 – सौ. ममता गद्रे   ।। ‘जगामधे जगमित्र । जिव्हेपासी आहे सूत्र’ ।। “ज्ञानदेवे रचिला पाया । कळस झळके वरी  तुकयाचा त्यावरी भगवा फडकतो ।…

शक्ति, भक्ति एवं संगठन का अद्भुत संगम – समर्थ रामदास स्वामी

 – शैलेश जोशी कहते है ईश्वर ने किसी भूमि पर जन्म लिया है तो वह भरतभूमि है। भारत यह अध्यात्म की भूमि है। भारत को…

शिशु शिक्षा – 3 (जीवन विकास की मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया)

 – नम्रता दत्त शिशु शिक्षा की इस श्रृंखला में हम मनोविज्ञान के आधार पर जीवन के विकास की यात्रा पर विचार एवं चिन्तन करेंगे। यह…