सा विद्या या विमुक्तये
✍ वासुदेव प्रजापति भारत के लिए यह एक अप्रत्याशित घटना थी। सन् 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत में आई। सात समुद्र पार से…
✍ वासुदेव प्रजापति आज हमारे देश में नाम को लेकर बहस छिड़ी हुई है। जो राष्ट्रवादी हैं, वे मानते हैं कि हमारे देश का नाम…
✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजी राज्य ने अपने हित के लिए हमारे सामाजिक ढ़ाँचे को छिन्न-भिन्न कर दिया। हमारे यहाँ व्यवस्थाओं का विकेंद्रीकरण था, अंग्रेजों ने…
✍ वासुदेव प्रजापति हमारी मान्यता है कि अव्यक्त परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना की है। इस सृष्टि में केवल मनुष्य ही नहीं हैं, अन्य…
✍ वासुदेव प्रजापति भारत में आदिकाल से श्रेष्ठ समाज व्यवस्था रही है। श्रेष्ठ समाज में दो विशेष बातें होती हैं, एक समृद्धि और दूसरी संस्कृति।…
✍ वासुदेव प्रजापति यंत्र मनुष्य जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। बिना यंत्र के उसका जीवन चल नहीं सकता। प्रातः जगने से लेकर रात्रि…
✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश में शिक्षा, चिकित्सा तथा धर्म अनादि काल से सेवा के क्षेत्र रहे हैं। सेवा से हमारा तात्पर्य आज की भाँति…
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिमी जीवन विचार और भारतीय जीवन विचार में आधारभूत अन्तर है। जहाँ पश्चिम ने भौतिकता को आधार बनाया है, वहीं भारत ने…
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिम की व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था का दुष्परिणाम भारतीय स्त्रियों पर सर्वाधिक हुआ। स्त्रियों पर हुए दुष्परिणामों का असर परिवार इकाई पर होना स्वाभाविक…
✍ वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा का पश्चिमीकरण जिन सिद्धांतों के आधार पर किया गया, उनमें “व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना” प्रमुख सिद्धांत है। व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना से…