सा विद्या या विमुक्तये
– वासुदेव प्रजापति भारत विश्व का प्रथम राष्ट्र है। विश्व के अनेक राष्ट्र जब पशुवत जीवन जीते थे, तब भारत ने ही उन्हें सभ्यता व…
– प्रशांत पोळ पिछले एक वर्ष से पूरा विश्व ‘कोरोना’ की महामारी से जूझ रहा हैं। इस महामारी पर वैक्सिन बनाना कितना कठीन हैं, यह…
– वासुदेव प्रजापति इससे पूर्व हमने मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में संस्कारों को समझा है। मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ के अन्तर्गत दो प्रकार के संस्कारों को जाना। पहले प्रकार…
– वासुदेव प्रजापति हम संस्कारों को तीन सन्दर्भों में समझ सकते हैं। ये तीन सन्दर्भ हैं —। मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भ में पारम्परिक कर्मकांड…
– वासुदेव प्रजापति संस्कार शब्द का प्रयोग सर्वत्र प्रचलित है। शिक्षा में संस्कारों का अभाव सर्वविदित है। विशेष रूप से शिशु शिक्षा में संस्कारों का…
– प्रशांत पोळ भारतीय चिकित्सा प्रणाली, एक अत्यंत विकसित पद्धति थी। इन पश्चिम के डॉक्टर्स को जिसका अंदाज भी नहीं था, ऐसी ‘प्लास्टिक सर्जरी’ जैसी…
– प्रशांत पोळ भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय तक्षशिला भारत में था। ईसा के लगभग…
– डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता नेताजी सुभाष चंद्र बोस को आजाद हिंद फौज अथवा इंडियन नेशनल आर्मी का वास्तविक संस्थापक और संगठक माना जाता है। भारत…
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने व्यष्टिगत विकास, समष्टिगत विकास और सृष्टिगत विकास को समझा, आज हम परमेष्ठीगत विकास को समझेंगे। विकास का यह अन्तिम…
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने व्यष्टि और समष्टि के सम्बन्धों को जाना, आज हम सृष्टि के साथ व्यक्ति के सम्बन्धों को जानने का प्रयत्न…