सा विद्या या विमुक्तये
– प्रशांत पोळ हजार-दो हजार वर्ष पहले, जब भारत विश्व व्यापार में सिरमौर था, तब उस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा था – कपड़ा उद्योग।…
– वासुदेव प्रजापति भारत में शिक्षा का विचार समग्रता में किया गया है। शिक्षा सदैव बालक को दी जाती है। किन्तु वह केवल बालक के…
– रवि कुमार योग आज सर्वदूर सभी की चर्चा का विषय बना है। गत कुछ वर्षों से यह सभी की दिनचर्या का भाग बना है।…
– वासुदेव प्रजापति भारत में दी जाने वाली शिक्षा भारतीय नहीं है। यह शिक्षा विद्यार्थी को जीवन के लिए नहीं अपितु नौकरी के लिए तैयार…
– प्रशांत पोळ रॉबर्ट बेरोन वोन हेन गेल्डर्न (१८८५-१९६८), इस लंबे चौड़े नाम वाले एक जाने-माने ऑस्ट्रियन एंथ्रोपोलॉजिस्ट हुए हैं। इनकी शिक्षा-दीक्षा विएना विश्वविद्यालय में…
– प्रशांत पोळ प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अंगस मेडिसन ने अपने ग्रंथ ‘द हिस्ट्री ऑफ वर्ल्ड इकॉनोमिक्स’ में विश्व के व्यापार की परिस्थिति भिन्न-भिन्न कालखण्डों में…
– वासदेव प्रजापति संस्कार परम्परा के अन्तर्गत अब तक हमने मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में, सामाजिक व सांस्कृतिक सन्दर्भ में तथा पारम्परिक कर्मकांड के सन्दर्भ के संस्कारों…
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में तथा सामाजिक व सांस्कृतिक सन्दर्भ में आने वाले संस्कारों के बारे में जानकारी प्राप्त की। आज…
– Shivakumar “SERVICE TO NATION IS SERVICE TO GOD. “MY RELIGION IS BHARATHEEYAM, MY DEITY IS BHARATH MATHA, MY DHARMA IS TO PREACH SATYA AND…
– प्रशांत पोळ आरंभ से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में विकेन्द्रीकरण का बड़ा महत्व रखा गया था जो आधुनिक केन्द्रीकरण और अस्पताल व्यवस्था के बिल्कुल भिन्न…