– राणा प्रताप सिंह जिसके लिए प्रत्येक माता-पिता व शिशु तृषित नेत्रों से निहारते रहते हैं। बालक के विकास में वैयक्तिक प्रतिभा (वंश परम्परा की…
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राष्ट्र जीवन में मकर संक्रांति का महत्व
– डॉ. राम देशमुख मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्रियाकलापों का उसके परिवार, वह जिस समाज में रहता है वह समाज एवं प्रकृति के साथ…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 49 (शिक्षा का सांस्कृतिक स्वरूप)
– वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा को जानने व समझने के लिए ज्ञान की बात नामक पाक्षिक स्तम्भ प्रारम्भ किया गया है। आज से ज्ञान की…
पाती बिटिया के नाम-40 (दोष हमारा, श्रेय राम का)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! अनायास समाचार पत्रों में पढऩे को मिला कि मा. आचार्य विष्णुकांतजी शास्त्री अब हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल होंगे। पढ़ते…
भारत में शिक्षा व्यवस्था
– अवनीश भटनागर भारत में समाज निर्माणकारी शिक्षा की संकल्पना थी। वेद, पुराण, उपनिषदों के लेखकों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और न ही…
ज्ञान की बात 48 (व्यक्ति को समर्थ बनाना)
– वासुदेव प्रजापति शिक्षा के प्रयोजनों को जानने के क्रम में हमने शिक्षा का सांस्कृतिक प्रयोजन, शिक्षा का राष्ट्रीय प्रयोजन एवं शिक्षा का सामाजिक प्रयोजन…
गीता में भाव-निष्पत्ति
– डॉ. विन्ध्यवासिनी प्रसाद त्रिपाठी गीता ग्रन्थ वाग्यज्ञ का प्रसाद है। भगवान कृष्ण इसके प्रस्तोता हैं, ये ही इस यज्ञ के ब्रह्मा हैं,म ये ही…
लोकमान्य तिलक जी द्वारा लिखित ‘गीता रहस्य’ एक अद्भुत साहित्य कृति
– डा. आशिष मुकंद पुराणिक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने जीवन काल में शिक्षा, राजनीति, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, अध्यात्म आदि ऐसे अनेक विषयों पर प्रस्तुतीकरण…
ज्ञान की बात 47 (शिक्षा समाजनिष्ठ होती है)
– वासुदेव प्रजापति शिक्षा के प्रयोजनों के अन्तर्गत हमने उसके सांस्कृतिक प्रयोजन एवं राष्ट्रीय प्रयोजन को जाना। आज हम शिक्षा के सामाजिक प्रयोजन को जानेंगे।…
पाती बिटिया के नाम-38 (प्रधानमंत्रीजी! जरा पहले आईए फिर मेरी गऊएँ आराम करेंगी…)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! दीपोत्सव के पाँच दिवसीय हर्षोल्लास का एक दिन समर्पित होता है गौमता को। तुम एकदम सही समझी, मैं बात…