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राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हमारी ज्ञान विरासत भाग-3

– वासुदेव प्रजापति रसायन शास्त्रज्ञों की भारत में कभी कमी नहीं रही। नागार्जुन, वाग्भट्ट, यशोधर, रामचन्द्र तथा सोमदेव प्रमुख रसायनज्ञ थे। हमारे यहाँ दस रस…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हमारी ज्ञान विरासत भाग-2

–  वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा भारतीय समाज की सुव्यवस्था का श्रेय सनातन शिक्षा व्यवस्था को है। डा. ए एस अल्तेकर के अनुसार उपनिषत्काल में भारत…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हमारी ज्ञान विरासत

 – वासुदेव प्रजापति आदिकाल से अखिल विश्व को देती जीवन यही धरा, गौरवशाली परम्परा। सघन ध्यान एकाग्र ज्योति से, किये गहनतम अनुसन्धान। कला शिल्प संगीत…

बच्चों के सिर से भय का भूत हटाएं

 – दिलीप वसंत बेतकेकर श्रुति छह माह की बालिका, फर्श पर खेल रही थी। निकट की स्टूल पर मिक्सर चल रहा था। धक्का लगा और…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-18 (आचार्य और छात्र सम्बन्ध)

 – वासुदेव प्रजापति आज के समय में सामान्य व्यक्ति भी यह कहता है कि हमारे जमाने में आचार्य-छात्र सम्बन्ध जितने मधुर थे, वैसे आज नहीं…

पाती बिटिया के नाम-12 (लंदन की धरती पर क्रांति योजना करने वाले क्रांति के राजदूत – रंगोबापू गुप्ते)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! 1857 की क्रांति का एक दुखद पहलु यह माना जाता है कि इसकी ज्वाला उत्तर भारत में तो दावानल…

महात्मा गांधी और ग्राम स्वराज की अवधारणा

 – नवीन कुमार वर्तमान समय में कोरोना वायरस (COVID-19) वैश्विक महामारी, जो पिछले वर्ष चीन के वुहान शहर से उत्पन्न हुई थी, ने सामाजिक, आर्थिक…

गाँधी जी की बुनियादी शिक्षा की वर्तमान में प्रासंगिकता 

  –  डॉ० कुलदीप मेहंदीरत्ता ‘आने वाली नस्लें शायद ही यकीन करे कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी इस धरती पर चलता-फिरता…

दीनदयाल उपाध्याय की विचार-दृष्टि और दर्शन – 4

 – डॉ. अनिल दत्त मिश्र उपाध्याय जी का एकात्म मानव दर्शन आज समय की आवश्यकता है और यह दर्शन न केवल भारत का मार्गदर्शन करने…

दीनदयाल उपाध्याय की विचार-दृष्टि और दर्शन – 3

 – डॉ. अनिल दत्त मिश्र भारतीय राज्य का आदर्श धर्मराज्य रहा है। धर्मराज्य से अर्थ कोई मजहबी राज्य नहीं हैं बल्कि यह एक असांप्रदायिक राज्य…