सा विद्या या विमुक्तये
संघ स्थापना की नींव में रखा गया यह संस्कार, आज 95 वर्ष बाद भी इस संगठन और इससे प्रेरणा पाने वालों को राह दिखाता है। संघकार्य के लिए जीवन अर्पण करने वाले ऋषितुल्य प्रचारक या गृहस्थ साधना के साथ संघमार्ग पर बने रहने की तपस्या करने वाले स्वयंसेवक- यह बात दुनिया को माननी होगी कि संघ ने कार्यकर्ताओं के रूप में अनमोल प्रतिभाओं को साथ जोड़ते हुए बेजोड़ काम खड़ा किया है। हर प्रांत और पृष्ठभूमि से संघ की ओर कदम बढ़े और यही कारण है कि आज समाज जीवन की हर दिशा में संघ विचार और प्रेरणा से भरे कार्यकर्ता, प्रकल्प और संस्थाएं दिखाई देते हैं।
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