सच में यदि परम पूजनीय डाक्टर हेडगेवार जी इस देश में अवतरित नहीं हुए होते तो मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण निःसन्देह आज भारत देश *हिन्दू राष्ट्र* के स्थान पर *इस्लामिक राष्ट्र* बन गया होता l डाक्टर साहब ने अपने आप को न्योछावर करते हुए, सनातनी संस्कृति और हम हिन्दुओं को जीवन दिया हैं l ऐसा नहीं था कि इस देश में सक्षम लोगों की कमी थी l धन-दौलत, शिक्षा – दीक्षा के साथ साथ सभी तरह से शक्ति संपन्न भी थे, परन्तु वे गुलामी में रहने के आदी हो गए थे, अपना स्वयं का स्वाभिमान भूल चुके थे l स्वतंत्रता के आनंद का आभास भी खो चुके थे l तभी तो इन स्वार्थी या बुजदिलों को संगठित करने और इनमे आत्मविश्वास की पूनरस्थापना के लिए डाक्टर साहब ने अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया और मात्र 50 वर्ष की अल्पआयु में ही सबकुछ छोड़ गए l सकारात्मक परिणाम यह रहा कि जिन स्वयं सेवकों को देश भक्ति का पाठ पढ़ाया था वे अपने पथ से विचलित नहीं हुए l परिणाम स्वरूप सतत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वे कार्य जिन्हे परम पूजनीय डाक्टर साहब समाज परिवर्तन के रूप में देखना चाहते थे वे सभी काम समाज के समक्ष प्रस्तुत हो गए हैं l प्रसन्नता हैं कि इस देश में ही नहीं विश्व के राष्टो में सनातनी संस्कृति की पूनरस्थापना हो चुकी हैं l संस्कृति के अतिरिक्त व्यक्ति निर्माण के साथ साथ विभिन्न गतिविधियों द्वारा आदर्श हिन्दू समाज बनाने में प्रयासरत भी हैं l भारत माता की जय !! वन्दे मातरम !! Reply