सा विद्या या विमुक्तये
– दिलीप वसंत बेतकेकर अभ्यास ‘अभ्यास’, ‘अध्ययन’ अध्ययन। यह अभ्यास- अध्ययन क्या है? इन शब्दों का उच्चारण दिन रात होता है। शिक्षकों द्वारा तैयार उत्तर…
– नम्रता दत्त नवजात शिशु बोल नहीं सकता। लेकिन किसी भी प्रकार का कष्ट अनुभव करने पर वह रोता है। जन्म के समय जब उसकी…
-डॉ प्रज्ञा शरद देशपांडे चौंसठ कलाओं में से एक और सबसे महत्त्वपूर्ण कला ‘बाल क्रीडा कर्म’ (बच्चों का खेल) है। बाल का अर्थ है- “बलति…
– वासुदेव प्रजापति प्रथम भाग में हमने जाना कि भाषा की मूल इकाई अक्षर है और इसकी व्याप्ति सम्पूर्ण जीवन है। अक्षर के विभिन्न पदार्थों…
शिशु की मानसिक आवश्यकतायें एवं स्वाभाविक विकास में परिवार की भूमिका – नम्रता दत्त अभी तक हम नव दम्पति के शिक्षण पर विचार कर रहे…
– वासुदेव प्रजापति आज विद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले सभी विषयों का सम्बन्ध शास्त्रों से है। सभी शास्त्र परस्पर एक दूसरे से सम्बन्धित…
– वासुदेव प्रजापति आज की शिक्षा व्यवस्था में सभी पठनीय विषयों को समान महत्त्व दिया जाता है। सभी विषय समान महत्त्व के नहीं हो सकते,…
– नम्रता दत्त श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति की आकांक्षा प्रत्येक माता पिता को होती है क्योंकि वे मरने के बाद भी अपनी संतान के रुप…
– दिलीप वसंत बेतकेकर गांव का मेला, नाटक अथवा किसी विशेष त्यौहार के अवसर पर बच्चों के हाथ में कुछ पैसे देने के दिन अब…
– रवि कुमार भिवानी की एक विद्यार्थी शाखा में नीतिश नाम के विद्यार्थी ने आना प्रारम्भ किया। नीतिश 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय का विद्यार्थी…