सुसंगति मिलती रहे

 – दिलीप बसंत बेतकेकर “तैयार हो गये क्या? जल्दी करो, देर हो रही है”, माँ ने अजय को चौथी बार याद दिलाते हुए कहा, परंतु…

पाती बिटिया के नाम-35 (आओ फिर से दिया जलाएँ)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! दीपोत्सव का पर्व फिर आ गया है, आपके और आपके मित्रों के मन में उमंग हिलोरे लेने लगी अभी…

बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा-27 (21वीं सदी के अभिभावकों की शिक्षा)

 – रवि कुमार ‘अभिभावक’ शब्द पर विचार करते हैं तो ध्यान में आता है माता-पिता। एक शब्द और चलता है – ‘पाल्य या पालक’ अर्थात्…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 41 (मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में संस्कार)

 – वासुदेव प्रजापति हम संस्कारों को तीन सन्दर्भों में समझ सकते हैं। ये तीन सन्दर्भ हैं —। मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भ में पारम्परिक कर्मकांड…