भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 55 (‘भाषा’ का सांस्कृतिक स्वरूप भाग एक)

 – वासुदेव प्रजापति भाषा मनुष्य के व्यक्तित्व के साथ अविभाज्य अंग के समान जुड़ी हुई है। भाषा विहीन व्यक्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 54 (पठनीय विषयों का सांस्कृतिक स्वरूप)

– वासुदेव प्रजापति   भारतीय ज्ञानधारा का मूल अधिष्ठान अध्यात्म है। अध्यात्म जब नियम व व्यवस्था में रूपान्तरित होता है, तब वह धर्म का स्वरूप…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 52 (विषयों में परस्पर सम्बन्ध)

 – वासुदेव प्रजापति आज विद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले सभी विषयों का सम्बन्ध शास्त्रों से है। सभी शास्त्र परस्पर एक दूसरे से सम्बन्धित…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 51 (शास्त्रों की रचना एवं स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति   अब तक हमने जाना कि परमात्मा की इस सृष्टि में मनुष्य का अति विशिष्ट स्थान है। क्योंकि केवल मनुष्य में ही…

भारत की स्वतन्त्रता में नागा वीरांगना रानी माँ गाईदिन्लियु का योगदान

 – पंकज सिन्हा एक वीरांगना थी। कालांतर में उनके अपने ही नहीं, अपितु जो भी उनके संपर्क में आया, वे सभी उन्हें रानी माँ ही…

विहार का स्वास्थ्य पर प्रभाव

 – रवि कुमार भिवानी की एक विद्यार्थी शाखा में नीतिश नाम के विद्यार्थी ने आना प्रारम्भ किया। नीतिश 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय का विद्यार्थी…

ज्ञान की बात 48 (व्यक्ति को समर्थ बनाना)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा के प्रयोजनों को जानने के क्रम में हमने शिक्षा का सांस्कृतिक प्रयोजन, शिक्षा का राष्ट्रीय प्रयोजन एवं शिक्षा का सामाजिक प्रयोजन…

ज्ञान की बात 47 (शिक्षा समाजनिष्ठ होती है)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा के प्रयोजनों के अन्तर्गत हमने उसके सांस्कृतिक प्रयोजन एवं राष्ट्रीय प्रयोजन को जाना। आज हम शिक्षा के सामाजिक प्रयोजन को जानेंगे।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 46 (शिक्षा राष्ट्रीय होती है)

 – वासुदेव प्रजापति भारत में शिक्षा का विचार समग्रता में किया गया है। शिक्षा सदैव बालक को दी जाती है। किन्तु वह केवल बालक के…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 45 (भारतीय शिक्षा सत्य व धर्म सिखाती है)

– वासुदेव प्रजापति भारत में दी जाने वाली शिक्षा भारतीय नहीं है। यह शिक्षा विद्यार्थी को जीवन के लिए नहीं अपितु नौकरी के लिए तैयार…