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संत कबीर जी का शिक्षा दर्शन : निहितार्थ
– डॉ० कुलदीप मेहंदीरत्ता आदिकाल से ही भारत विचारकों, ऋषि-मुनियों, संतों और मनीषियों की जन्मभूमि तथा कार्यभूमि रही है। यह भारत का सौभाग्य रहा है…
पाती बिटिया के नाम-4 (वे अद्वितीय बलिदान)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! कई बार आपसे बलिदानों के विषय में चर्चा हुई है। देश, धर्म और संस्कृति हेतु अपने प्राणों की आहूति…
वर्तमान परिस्थिति में भारतीय जीवनदृष्टि की प्रासंगिकता-2
– वासुदेव प्रजापति जीवन एक व अखण्ड़ है भारत की दृष्टि में जीवन एक है, यही एक जीवन जन्मजन्मान्तरों में अखण्ड चलता रहता है। एक…
वर्तमान परिस्थिति में भारतीय जीवनदृष्टि की प्रासंगिकता-1
– वासुदेव प्रजापति आज संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी के प्रकोप से त्रस्त है। इस समय सभी देश अपने-अपने देशवासियों को कोरोना विषाणु से बचाने…
शब्द सामर्थ्य-11, थ, द
शब्द अर्थ थ थहराना भय से कांपना थाती अमानत द दंड-भंग शासन का उल्लंघन दंतकथा कल्पित कथा दक्षिणाचारी सदाचारी दयार्द्र दया से पसीजने वाला दर्प…
शिक्षा के मॉडल में आमूलचूल परिवर्तन का सही समय : कोरोना पूर्व एवं पश्चात्
– डॉ० विकास दवे इस समय संपूर्ण विश्व कोरोना के संकट काल से गुजर रहा है। इस विषाणु ने पूरी दुनिया को एक बार फिर…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-9 (ज्ञानार्जन के साधन : बुद्धि)
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने जाना कि कर्मेन्द्रियों से ज्ञानेन्द्रियाँ अधिक प्रभावी हैं और ज्ञानेन्द्रियों से मन अधिक प्रभावी है। मन इसलिए अधिक प्रभावी…
कोरोना और बाल मनोविज्ञान
– डॉ विकास दवे कोरोना विषाणु की महामारी केवल भारतीय समाज ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक नया तथा विज्ञान और मनोविज्ञान से…
शब्द सामर्थ्य-10, त, त्र
शब्द अर्थ त तंगहाल संकट तंद्रा थकान तटस्थ दोनों दलों से अलग तत्त्वदर्शी दार्शनिक तत्सम शुद्ध तथोक्त उस तरह कहा हुआ तदनुसार उसके अनुसार तनु-पात…
पाती बिटिया के नाम-3 (जिजा के लाल)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया। पिछली चिट्ठियों में तुमने देखा कि किस तरह शिवाजी के व्यक्तित्व का निर्माण हुआ और कैसे संस्कार उनके एक…