भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-32 (आनन्द मय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात् आज हम इस कथा को पूर्ण करते हैं। अब तक हमने इस कथा में जाना कि महर्षि वरुण के…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-31 (विज्ञानमय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति विज्ञानं ब्रह्मेति व्यजानात् अपने पिता की आज्ञा पाकर भृगु ने तप किया, और तप करके जाना कि विज्ञान स्वरूप चेतन जीवात्मा ही…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-30 (मनोमय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति मनो ब्रह्मेति व्यजानात् आपके ध्यान में आया होगा कि एक ही कथा निरन्तर चल रही है। पुत्र भृगु अपने पिता वरुण के…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-29 (प्राणमय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति प्राणों ब्रह्मेति व्यजानात् इससे पूर्व की कथा में पिता वरुण के कहने पर भृगु ने तप किया और तप करके जाना कि…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-27 (भारतीय शिक्षा का प्रतिमान : समग्र विकास)

 – वासुदेव प्रजापति आज का विषय प्रारम्भ करने से पूर्व एक संस्मरण का स्मरण कर लेते हैं – मैडम मैं नाली बना रहा हूँ यह…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-26 – (व्यक्ति, व्यक्तित्व और विकास)

 – वासुदेव प्रजापति आजकल “व्यक्तित्व विकास” शब्द अत्यधिक प्रचलित है। अनेक व्यक्ति व संस्थान व्यक्तित्व विकास शब्द के स्थान पर “पर्सनेलिटी डेवलपमेंट” शब्द का प्रयोग…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-24 – (दान)

 – वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा की एक प्रमुख विशेषता अर्थ-निरपेक्षता है। आज हमनें पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित होकर जीवन में अर्थ को सर्वोपरि मान लिया…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-18 (आचार्य और छात्र सम्बन्ध)

 – वासुदेव प्रजापति आज के समय में सामान्य व्यक्ति भी यह कहता है कि हमारे जमाने में आचार्य-छात्र सम्बन्ध जितने मधुर थे, वैसे आज नहीं…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-15 (ज्ञान प्राप्त करने की योग्यता)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने ज्ञानार्जन के करण, करणों का विकास, करणों की सक्रियता, ज्ञानार्जन प्रक्रिया तथा करण- उपकरण विवेक को समझा। आज हम…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-14 (करण-उपकरण-विवेक)

 – वासुदेव प्रजापति संस्कृत शब्द करण से हम भली-भाँति परिचित हैं। करण के आगे उप उपसर्ग लगने से उपकरण शब्द बनता है। करण का अर्थ…