स्वतन्त्रता का सूर्य – नेताजी सुभाष बोस

– डा. हिम्मत सिंह सिन्हा सुभाष चन्द्र बोस भारत के क्षीतिज पर उज्ज्वल नक्षत्र बनकर उभरे – कवियों ने ऐसा यशोगान किया है। जनवरी 1992…

राष्ट्र जीवन में मकर संक्रांति का महत्व

 – डॉ. राम देशमुख   मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्रियाकलापों का उसके परिवार, वह जिस समाज में रहता है वह समाज एवं प्रकृति के साथ…

भारत में शिक्षा व्यवस्था

– अवनीश भटनागर भारत में समाज निर्माणकारी शिक्षा की संकल्पना थी। वेद, पुराण, उपनिषदों के लेखकों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और न ही…

स्वतंत्रता आन्दोलन का जयघोष मंत्र वंदेमातरम्

-रवि कुमार स्वतंत्रता अमूल्य है और यह हमें अनथक प्रयासों के कारण मिली है। हमारी स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन का बलिदान…

आजादी का अमृत महोत्सव

– रवि कुमार अगस्त 15, सन् 1947 को भारत देश स्वतंत्र हुआ। असंख्य लोगों के बलिदान के कारण हमें स्वतंत्रता मिली। यह स्वतंत्रता बहुमूल्य नहीं…

रामानुजाचार्य और उनका विशिष्टाद्वैत वेदान्त

 – डॉ गिरिधर गोपाल शर्मा भारतीय मनीषा का चरमोत्कर्ष ‘वेदान्त-दर्शन’ में प्राप्त होता है। ‘वेदान्त’ शब्द का अर्थ है- “उपनिषद्”। इन उपनिषदों में वेद के…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-33 (व्यक्तिगत विकास की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने समग्र विकास प्रतिमान के प्रथम भाग में पंचकोशात्मक विकास को समझा है। आज से हम दूसरा भाग परमेष्ठीगत विकास…

जगतगुरु आद्य शंकराचार्य का शिक्षा दर्शन

 – गिरीश जोशी भगवान वेदव्यास द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र परम ज्ञान की प्राप्ति हेतु मानव के मन मस्तिष्क में जितने भी प्रश्न-जिज्ञासा हो सकती है उन…

पाती बिटिया के नाम-24 (जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादऽपि गरियसी)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! केसर की क्यारी कश्मीर गोला बारूद की जहरीली हवा की चपेट में एक बार फिर आ गई। एक बार…

श्रीराम – सुशासन के प्रतीक महापुरुष

भगवान श्रीराम अविनाशी परमात्मा है जो सबके सृजनहार व पालनहार हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया में श्रीराम अत्यंत पूजनीय हैं और आदर्श पुरुष हैं।