सा विद्या या विमुक्तये
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! इन दिनों तुमको लिखने-पढऩे का शौक चर्राया है। बेटे! आपकी आयु में सबको लिखने का अत्यधिक शौक रहता है…
– डॉ विकास दवे विश्व का हर देश जब भी दिग्भ्रमित हो लडख़ड़ाया। लक्ष्य की पहचान करने इस धरा के पास आया।। प्रिय बिटिया! आज…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! जीवन में अनेको बार ऐसे प्रसंग उपस्थित होते हैं जब हम किसी अच्छे कार्य को सीखने या करने के…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! साहस, हिम्मत और बहादुरी की बातें तो सभी करते हैं, किन्तु जब मौका आता है तो सारी बातें हवा…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! सिक्के के दो पहलू होते हैं। सत्य के साथ असत्य भी होता है, अच्छाई के साथ बुराई भी होती…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! नए सत्र का प्रारंभ हुआ। नई-नई पुस्तकें सामने आ गई। एक बार फिर युद्ध छिड़ गया, वर्ष भर के…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! अधिकांशत: तो क्रातिकारियों और महापुरुषों के चित्रों को देखकर आप लोग अपनी कल्पनाओं में उनके व्यक्तित्व का अंदाजा लगा…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! कुछ समय पूर्व की बात है। दो भैया आपस में लड़कर अपनी शिकायत लेकर मेरे पास आए थे। दोनों…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! राजा शंकर शाह क्रोध से आग बबूला हो रहे थे। उनके राज्य गढ़ मण्डला में भ्रष्टाचार को देशद्रोही से…
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! कानपुर के एक गरीब परिवार में जन्मे थे अजीमुल्ला। बचपन से ही उनकी चपलता और कुशाग्र बुद्धि अंग्रेज पादरियों…