✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश में शिक्षा, चिकित्सा तथा धर्म अनादि काल से सेवा के क्षेत्र रहे हैं। सेवा से हमारा तात्पर्य आज की भाँति…
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दृढ़ निश्चयी बालाजी
✍ गोपाल माहेश्वरी चिंगारियाँ अंगार से जब आग लेकर छूटती हैं। बुझने से पहले वह समूचा वन जलाती लूटती हैं।। वह सारी रात जागा था…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 86 (भौतिक आधार के दुष्परिणाम)
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिमी जीवन विचार और भारतीय जीवन विचार में आधारभूत अन्तर है। जहाँ पश्चिम ने भौतिकता को आधार बनाया है, वहीं भारत ने…
स्वयं दें मन को सूचना
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर हम निरंतर बोलते रहते हैं- एक प्रकार से अन्य व्यक्ति के साथ जो तेज आवाज के साथ प्रक्रिया है। और दूसरे…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 85 (भारतीय परिवार परम्परा पर आघात)
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिम की व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था का दुष्परिणाम भारतीय स्त्रियों पर सर्वाधिक हुआ। स्त्रियों पर हुए दुष्परिणामों का असर परिवार इकाई पर होना स्वाभाविक…
गुरु आश्रम की ओर
✍ गोपाल माहेश्वरी प्रातःकाल पाँच बजने को थे कि घर में खटर-पटर की आवाजों से गौरव की नींद टूट गई। उसे पता था दादा जी-…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 84 (व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था के दुष्परिणाम)
✍ वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा का पश्चिमीकरण जिन सिद्धांतों के आधार पर किया गया, उनमें “व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना” प्रमुख सिद्धांत है। व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना से…
नमस्ते वन देवता
✍ गोपाल माहेश्वरी प्राकृत अपनी सायकिल लेकर प्रातः से ही निकल पड़ा था। शीतलमंद पवन के झकोरे उसके तन मन में स्फूर्ति और आनंद का …
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 83 (बुद्धि विभ्रम के कारण व परिणाम)
✍ वासुदेव प्रजापति अब तक हमने अंग्रेजी शिक्षा का हमारे मन और बुद्धि पर क्या परिणाम हुआ उसे जाना, अब हम ये जानेंगे कि उन्होंने…
श्रद्धावान लभते ज्ञानम्
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर क्या सदैव ‘नारायण नारायण’ जपते रहते हो, इस खंभे में है तेरा नारायण? गुस्से से लाल, तमतमाते चेहरे से हिरण्यकश्यप ने…