✍ वासुदेव प्रजापति भारत में आदिकाल से श्रेष्ठ समाज व्यवस्था रही है। श्रेष्ठ समाज में दो विशेष बातें होती हैं, एक समृद्धि और दूसरी संस्कृति।…
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गीता प्रेस, गोरखपुर का सांस्कृतिक अवदान
✍ अवनीश भटनागर (श्रद्धेय भाई जी – श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार की जन्मजयंती (17 सितम्बर) पर उनके द्वारा स्थापित वैचारिक क्रान्ति के आधार स्तम्भ…
मोक्ष
✍ गोपाल माहेश्वरी वह था तो अभी मात्र दस वर्ष का पर माता-पिता के असमय ही सदा के लिए छूट जाने के बाद एकदम अकेला…
ध्यान रहे लक्ष्य पर
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर “हां जी, टिकट दिखाइए जल्दी अपना अपना रेलवे का टिकट निरीक्षक यात्रियों के बीच हाथ में चार्ट लेकर बोला! पांच-छह यात्रियों…
National Education Policy–2020 And Classroom Transactions
✍ D. Ramakrishna rao National Education Policy – 2020 aims to provide quality education by 2030 not only for life changing but also mind crafting…
आहार ही औषध – आहार चिकित्सा
✍ रवि कुमार करनाल (हरियाणा) के एक कार्यकर्त्ता से उनकी आयु के विषय में चर्चा हुई। उन्होंने कहा आप ही बताएं कि मेरी आयु कितनी…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 88 (यंत्रों का अन्धाधुन्ध प्रयोग)
✍ वासुदेव प्रजापति यंत्र मनुष्य जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। बिना यंत्र के उसका जीवन चल नहीं सकता। प्रातः जगने से लेकर रात्रि…
भारतीय परम्परागत खेल : बाल विकास का सशक्त माध्यम
✍ अवनीश भटनागर उत्साह, जोश, मस्ती तथा रोमांच से भरपूर खेलकूद बच्चों को तो क्या, बड़ों को भी पसन्द हैं। दुनियाँ के सभी देशों में…
चिंतन और चेतना
✍ गोपाल माहेश्वरी चिंतन और चेतना सगे भाई-बहिन हैं। नाम का प्रभाव उनके विचारों पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। पिताजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के…
सुनिए कान, मन, आंखों से’!
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर धोंडोजी और गुंड्रोजी एक बार रास्ते में मिले, आपस में बातचीत होने लगी! धोंडोजी गुंडों जी से पूछने लगे- कहो गुंडों…