भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 54 (पठनीय विषयों का सांस्कृतिक स्वरूप)

– वासुदेव प्रजापति   भारतीय ज्ञानधारा का मूल अधिष्ठान अध्यात्म है। अध्यात्म जब नियम व व्यवस्था में रूपान्तरित होता है, तब वह धर्म का स्वरूप…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 53 (शिक्षा में अंगांगी भाव का विचार)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने अंगांगी भाव को विभिन्न आयामों में समझा है। आज हम अंग और अंगी के सम्बन्ध में आवश्यक अनिवार्यताओं को…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 51 (शास्त्रों की रचना एवं स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति   अब तक हमने जाना कि परमात्मा की इस सृष्टि में मनुष्य का अति विशिष्ट स्थान है। क्योंकि केवल मनुष्य में ही…

स्वतन्त्रता का सूर्य – नेताजी सुभाष बोस

– डा. हिम्मत सिंह सिन्हा सुभाष चन्द्र बोस भारत के क्षीतिज पर उज्ज्वल नक्षत्र बनकर उभरे – कवियों ने ऐसा यशोगान किया है। जनवरी 1992…

राष्ट्र जीवन में मकर संक्रांति का महत्व

 – डॉ. राम देशमुख   मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्रियाकलापों का उसके परिवार, वह जिस समाज में रहता है वह समाज एवं प्रकृति के साथ…

भारत में शिक्षा व्यवस्था

– अवनीश भटनागर भारत में समाज निर्माणकारी शिक्षा की संकल्पना थी। वेद, पुराण, उपनिषदों के लेखकों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और न ही…

स्वतंत्रता आन्दोलन का जयघोष मंत्र वंदेमातरम्

-रवि कुमार स्वतंत्रता अमूल्य है और यह हमें अनथक प्रयासों के कारण मिली है। हमारी स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन का बलिदान…

आजादी का अमृत महोत्सव

– रवि कुमार अगस्त 15, सन् 1947 को भारत देश स्वतंत्र हुआ। असंख्य लोगों के बलिदान के कारण हमें स्वतंत्रता मिली। यह स्वतंत्रता बहुमूल्य नहीं…

रामानुजाचार्य और उनका विशिष्टाद्वैत वेदान्त

 – डॉ गिरिधर गोपाल शर्मा भारतीय मनीषा का चरमोत्कर्ष ‘वेदान्त-दर्शन’ में प्राप्त होता है। ‘वेदान्त’ शब्द का अर्थ है- “उपनिषद्”। इन उपनिषदों में वेद के…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-33 (व्यक्तिगत विकास की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने समग्र विकास प्रतिमान के प्रथम भाग में पंचकोशात्मक विकास को समझा है। आज से हम दूसरा भाग परमेष्ठीगत विकास…