जगतगुरु आद्य शंकराचार्य का शिक्षा दर्शन

 – गिरीश जोशी भगवान वेदव्यास द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र परम ज्ञान की प्राप्ति हेतु मानव के मन मस्तिष्क में जितने भी प्रश्न-जिज्ञासा हो सकती है उन…

पाती बिटिया के नाम-24 (जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादऽपि गरियसी)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! केसर की क्यारी कश्मीर गोला बारूद की जहरीली हवा की चपेट में एक बार फिर आ गई। एक बार…

श्रीराम – सुशासन के प्रतीक महापुरुष

भगवान श्रीराम अविनाशी परमात्मा है जो सबके सृजनहार व पालनहार हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया में श्रीराम अत्यंत पूजनीय हैं और आदर्श पुरुष हैं।

शक्ति, भक्ति एवं संगठन का अद्भुत संगम – समर्थ रामदास स्वामी

 – शैलेश जोशी कहते है ईश्वर ने किसी भूमि पर जन्म लिया है तो वह भरतभूमि है। भारत यह अध्यात्म की भूमि है। भारत को…

संत तुकाराम का जीवन दर्शन

 – सौ. प्रांजली अजय आफळे अणूरेणिया थोकडा तुका आकाशाएवढा ।।१।। अर्थात् कभी अणु की तरह सूक्ष्म संत तुकाराम गगन की तरह असीम हो गये हैं।…

अपडेट और आउटडेट

 – दिलीप वसंत बेतकेकर ‘मोबाइल फोन किस-किसके पास है?’ ऐसा पूछने पर अनेक लोग प्रश्नार्थक मुद्रा से देखने लगे। सभी ने हाथ ऊपर किये। फिर…

संत रविदास जी का जीवन- दर्शन

 – डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता भारत देश की पवित्र भूमि पर समय-समय पर ऋषि-मुनियों, संत जनों और महापुरुषों ने अवतार लिया है और अपने अद्भुत और…

पाती बिटिया के नाम-20 (विश्व का हर देश)

 – डॉ विकास दवे विश्व का हर देश जब भी दिग्भ्रमित हो लडख़ड़ाया। लक्ष्य की पहचान करने इस धरा के पास आया।। प्रिय बिटिया! आज…

சர்வதேச தாய்மொழி தினம்

மனித இனம் தோன்றியதுமுதல் மனிதர்கள் ஒருவருக்கொருவர் தங்களுக்குள் தொடர்பைஏற்படுத்திக் கொள்ளதாங்கள்; அறிந்தசொற்களைத் தொகுத்துமொழியாகமாற்றினர்;. உலகில் ஏறத்தாழஆறாயிரம் மொழிகள் பேசப்படுகின்றன. ஒருமொழியின் சிறப்புஅதன் தொன்மையில் இல்லை;தொடர்ச்சியில் தான் இருக்கிறது. ஒவ்வொரு மொழிக்கும் அந்தமொழிக்கேயுரிய சிறப்பம்சங்கள் உண்டு.…

मातृभाषा मराठी चे महत्त्व

– सौ. प्रांजली जोशी लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी जाहलो खरेच धन्य ऐकतो मराठी धर्म, पंथ, जात एक जाणतो मराठी एवढ्या जगात माय मानतो मराठी श्रेष्ठ  कवी सुरेश भट यांनी आपल्या काव्यात मराठी या भाषेची महानता व्यक्त केली ती सार्थ आहे. आम्हा महाराष्ट्रीयांची ‘मातृभाषा’ ही मराठी आहे. ही भाषा आमची ‘आई’. माता बोलते म्हणून नाही तर ती आमची संस्कृती आहे. ही ‘मराठी’ मातृभाषा आमच्या मनामनात, रोमारोमात भिनलेली आहे. या भाषेची स्पंदने उराउरात भरलेली आहेत. का नसावा आम्हाला आमच्या मातृभाषेचा अभिमान! आमची भाषा अमृताशी पैजा जिंकणारी आहे. तिला एक इतिहास आहे. त्या इतिहासाचे पुरावे आहेत. आमची मातृभाषा नदीसारखी प्रवाही आहे. काळाच्या ओघात स्वतःला बदलवणारी आहे. नीरक्षीर विवेकबुद्धीने इतरांना सोबत घेऊन चालणारी आहे.…