NATIONAL EDUCATION POLICY – 2020: STRATEGY FOR IMPLEMENTATION

 – D. RAMAKRISHNA RAO   New national education policy – 2020 is launched by Government of India after much consultation, discussions, conducting seminars, holding workshops…

पाती बिटिया के नाम-9 (अंगारे बरसाती कलम के धनी : अजीमुल्ला खाँ)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! कानपुर के एक गरीब परिवार में जन्मे थे अजीमुल्ला। बचपन से ही उनकी चपलता और कुशाग्र बुद्धि अंग्रेज पादरियों…

भारत केन्द्रित राष्ट्रीय शिक्षा नीति वैश्विक उद्देश्यों की पूर्ति करेगी

 – देशराज शर्मा आखिर 2015 से बहुप्रतीक्षित नई शिक्षा नीति को केन्द्रीय मंत्रीमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का जन्म…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-15 (ज्ञान प्राप्त करने की योग्यता)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने ज्ञानार्जन के करण, करणों का विकास, करणों की सक्रियता, ज्ञानार्जन प्रक्रिया तथा करण- उपकरण विवेक को समझा। आज हम…

ਗੁਰੂ ਮਾਨਿਓ ਗ੍ਰੰਥ (ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪੂਰਬ ’ਤੇ ਵਿਸੇ਼ਸ਼)

       – ਡਾ਼ ਸੁਰਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ ਦਵੇਸ਼ਵਰ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਸਿੱਖ ਵਿਰਸੇ ਦਾ ਅਜਿਹਾ ਸਰਬਸਾਂਝਾ, ਪ੍ਰਮਾਣਿਕ ਅਤੇ ਪਾਵਨ ਗ੍ਰੰਥ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ…

पांच अगस्त, पांच सौ वर्षों का संघर्ष और साधना : श्रीराम जन्मभूमि

 – पिंकेश लता रघुवंशी अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते । जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥ लंका विजयोपरांत लंका के वैभव और बनावट देख…

पाती बिटिया के नाम-8 (एम.वाय.अस्पताल में खड़ा वह नीम का पेड़)

– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया, इंदौर के निकट ही स्थित है धार और इस जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. की दूरी पर स्थित…

ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਿੱਖਿਆ ਨੀਤੀ ਪਿਛਲੇ ਸਮੇਂ ਦੇ ਤਜ਼ਰਬਿਆਂ, ਵਰਤਮਾਨ ਦੀਆਂ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਅਤੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਦਿਆਂ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ: ਡੀ. ਰਾਮਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਰਾਓ

ਅਖਿਲ ਸਿੱਖਿਅਾ ਵਿਦਿਆ ਭਾਰਤੀੀਅਾ ਦੀ ਪੂਜਾ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਸ਼੍ਰੀ ਡੀ. ਰਾਮਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਰਾਓ ਦਾ ਪ੍ਰੈਸ ਛੇ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ, ਅਕਾਦਮਿਕਾਂ, ਬੁੱਧੀਜੀਵੀਆਂ, ਚਿੰਤਕਾਂ, ਸਿੱਖਿਆ ਮਾਹਿਰਾਂ , ਪ੍ਰਬੰਧਕਾਂ ਅਤੇ…

बच्चे झूठ क्यों बोलते हैं?

 – दिलीप वसंत बेतकेकर मार्च 1992 के ‘‘रीडर्स डायजेस्ट’’ के अंक में पॉल एक्मन का लेख “When your child lies”  (जब आपका बच्चा झूठ बोलता…

‘सा विद्या या विमुक्तये’ को प्रकट करती राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

 – पिंकेश लता रघुवंशी तत्कर्म यन्न बन्धाय सा विद्या या विमुक्तये। आयासायापरं कर्म विद्यऽन्या शिल्पनैपुणम्॥ विष्णु पुराण के प्रथम स्कंध उन्नीसवें अध्याय के 41वे श्लोक…