✍ रवि कुमार बाईस जनवरी को अयोध्या जी में रामलला की मूर्ति स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा से सम्पूर्ण देश का जो वातावरण राममय हुआ, उसके…
Tag: Rashtriya shiksha
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 101 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – भारतीय जीवनदृष्टि एवं शोधदृष्टि)
✍ वासुदेव प्रजापति किसी भी देश के वैचारिक क्षेत्र में जब अनवस्था होती है तब उसके सामाजिक जीवन में अव्यवस्थाएँ फैलती हैं। समाज में चिन्तन-मनन…
लोकनायक श्रीराम – ३
✍ प्रशांत पोळ मुनीश्रेष्ठ विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण चल रहे हैं। वें गंगा नदी पार कर, दक्षिण तट पर आते हैं। प्रवास पुनः…
पढ़ेंगे तभी बढ़ेंगे – १
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर वाचन अध्ययन का पहला पायदान है। अध्ययन की शुरुआत वाचन से ही होती है। आगे तो हम अनेक कौशल्य देखने वाले…
बाल बलिदानी रामचन्द्र
✍ गोपाल माहेश्वरी मातृ भू की पीर की करना पढ़ाई जानते थे। रक्त से जय मातृ भू की वे लिखाई जानते थे।। खाली समय में…
विश्वहित का अनुसंधान यज्ञ
✍ गोपाल माहेश्वरी उनके सामने मिट्टी की दो मटकियां, एक बड़े से कटोरे जैसे पात्र में बारीक छनी हुई मिट्टी का गाढ़ा घोल और कपड़े…
इंद्र विद्यावाचस्पति की राष्ट्र को देन
✍ प्रोफेसर बाबूराम विश्व में जीवन यापन की दो दिशाएं हैं – 1. संस्कृतिमूल्क 2. सभ्यतामूलक। भारतवर्ष विश्व के प्राचीनतम देश की अपेक्षा राष्ट्र अधिक…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 99 (परिवार व समाज में समरसता लाना)
✍ वासुदेव प्रजापति पूर्व अध्याय में हमने हीनताबोध और उसका स्वरूप क्या है? यह समझा और उससे मुक्त होने के लिए मनोवैज्ञानिक उपाय करने की…
डाकोर जी का शंकर
✍ गोपाल माहेश्वरी वीरों की गाथाएँ सुनकर वीरोचित मानस बनता है। मातृभूमि पर बलि होने का बच्चों में साहस ठनता है।। कहानियाँ तो प्रायः सभी…
लोकनायक श्रीराम – २
✍ प्रशांत पोळ सृष्टि के पालनकर्ता, सर्वव्यापी नारायण ने निर्णय लिया है, रावण जैसी आसुरी शक्ति के निर्दालन के लिए, ईश्वाकु कुल के वंशज, राजा…