भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 101 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – भारतीय जीवनदृष्टि एवं शोधदृष्टि)

 ✍ वासुदेव प्रजापति किसी भी देश के वैचारिक क्षेत्र में जब अनवस्था होती है तब उसके सामाजिक जीवन में अव्यवस्थाएँ फैलती हैं। समाज में चिन्तन-मनन…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 100 (साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाना)

 ✍ वासुदेव प्रजापति गत अध्याय में हमने सामाजिक समरसता निर्माण करने के विषय में जाना। सामाजिक समरसता के समान ही दूसरा महत्वपूर्ण विषय साम्प्रदायिक सौहार्द…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 97 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा के करणीय प्रयास)

 ✍ वासुदेव प्रजापति ‘ज्ञान की बात’ का आज से पाँचवें वर्ष में प्रवेश हो रहा है। अब तक हमने 96 ज्ञान की बातों का पठन…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 96 (आशा की किरण कहाँ हैं?)

 ✍ वासुदेव प्रजापति यूरोप ने पाँच सौ वर्ष पूर्व सम्पूर्ण विश्व का यूरोपीकरण करने का बीड़ा उठाया था। पूरे विश्व में छा जाने हेतु यूरोप…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 95 (यूरोपीकरण और साम्यवाद)

 ✍ वासुदेव प्रजापति आजकल हमारे देश में साम्यवाद शब्द बड़ा प्रचलित है। यह साम्यवाद शब्द भी यूरोपीकरण का ही एक आयाम है। हमारे यहाँ अंग्रेजी…

भारतीय ज्ञान का खजाना-25 (अद्वितीय आयुर्वेद)

✍ प्रशांत पोळ ईडलबर्ग जर्मनी का एक छोटा सा शहर है। इसकी जनसंख्या मात्र डेढ़ लाख है। परंतु यह शहर जर्मनी में वहाँ की शिक्षा…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 94 (भारत में अंग्रेजों के छद्म उद्देश्य)

 ✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों का भारत में आने का मुख्य उद्देश्य तो लूट करना ही था। वे यह लूट दीर्घकाल तक कर सकें इसलिए उसे…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 93 (भारत के गुलाम होने के कारण)

 ✍ वासुदेव प्रजापति भारत के लिए यह एक अप्रत्याशित घटना थी। सन् 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत में आई। सात समुद्र पार से…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 92 (भारत के विषय में घोर अज्ञान)

 ✍ वासुदेव प्रजापति आज हमारे देश में नाम को लेकर बहस छिड़ी हुई है। जो राष्ट्रवादी हैं, वे मानते हैं कि हमारे देश का नाम…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 91 (दायित्व बोध का अभाव)

 ✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजी राज्य ने अपने हित के लिए हमारे सामाजिक ढ़ाँचे को छिन्न-भिन्न कर दिया। हमारे यहाँ व्यवस्थाओं का विकेंद्रीकरण था, अंग्रेजों ने…