सा विद्या या विमुक्तये
✍ गोपाल माहेश्वरी वीर ने जैसे ही दीपक जलाए हवा के झोंके ने बुझा दिए। उसने फिर जलाए, फिर ऐसा ही हुआ। तीसरी चौथी बार…
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर स्वामी विवेकानन्द एक बार एक छोटे से पुल से जा रहे थे, पुल के नीचे बहुते हुए पानी में अंडों के…
✍ वासुदेव प्रजापति आज हमारे देश में नाम को लेकर बहस छिड़ी हुई है। जो राष्ट्रवादी हैं, वे मानते हैं कि हमारे देश का नाम…
विजयादशमी (24 अक्टूबर) तथा महर्षि वाल्मीकि जयंती (28 अक्टूबर) पर विशेष ✍ अवनीश भटनागर आदिकवि वाल्मीकि जी के जीवन के सम्बन्ध में विष्णु पुराण, पद्मपुराण…
– डॉ. कृष्णगोपाल सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में जीवित रहने का मूल आधार ‘स्व’ है। स्व नहीं तो समाज भी नहीं रह सकता।…
✍ डॉ. महेश्वर गं कळलावे पू. पांडुरंग शास्त्री आठवले का जन्म 19 अक्टूबर 1920 को महाराष्ट्र के कोंकण प्रांत के रोहा गाँव में हुआ। उन्हें…
– गोपाल माहेश्वरी “जीवन दीप जले ऐसा सब जग को ज्योति मिले, जीवन दीप जले।” संघ में गाए जाने वाले इस गीत के भाव जिनके…
– निखिलेश महेश्वरी भारतीय संस्कृति और इतिहास आज की युवा तरुणाई को मार्ग दिखाने में सक्षम है। यह प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता के साथ ही मानव…
✍ अश्वनी कुमार नायक गोपबंधु दास (1877-1928), जिन्हें उत्कलमणि गोपबंधु दास (उत्कल या ओडिशा का रत्न) के नाम से जाना जाता है, वह एक सामाजिक,…
✍ प्रशांत पोळ ईसवी सन् की दसवीं शताब्दी में, अर्थात् ई.स. 1000 में, भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति था। प्रोफेसर अंगस मेडिसन ने…