स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर शिक्षा की स्वतंत्रता

-डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता यह एक सर्वमान्य तथा सर्वस्वीकृत तथ्य है कि भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था। 1757 में प्लासी के युद्ध से…

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का शिक्षा दर्शन

– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और में इसे लेकर रहूँगा” की उद्‌घोषणा करने वाले तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों…

लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक-आद्य “राष्ट्रीय शैक्षणिक क्रांतिकारक”

 – डॉ. वसुधा विनोद देव लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक भारतीय असंतोषाचे जनक, उत्कृष्ट लेखक, धुरंधर राजकारणी, तत्वज्ञ, समाज सुधारक, श्रीमदभगवदगीतेचे भाष्यकार, थोर राष्ट्रभक्त, थोर द्रष्टे…

भारतीय ज्ञान का खजाना-8 (भारतीय शिल्पकला – कला की सर्वोच्च अभिव्यक्ति)

–  प्रशांत पोळ सन् 1957 की घटना है। उज्जैन में रहने वाले एवं पुरातत्व विषय के विश्व प्रसिद्ध जानकार, डॉक्टर श्रीधर विष्णु वाकणकर, ट्रेन से…

योगस्य आधारभूताः वेदाः

– प्रज्ञा जगतः सकलविद्याः ज्ञानानि च, भौतिकविज्ञानम् आहोस्वित् आत्मपरमात्मनोः अथवा मनसा सम्बद्धम् अध्यात्मविज्ञानं भवतु, सर्वेषां आदिमूलम् अर्थात् सर्वेषाम् आधारभूताः वेदाः सन्ति। वेदानाम् उपाङ्गस्वरूपेण दर्शनशास्त्राणि गृह्यन्ते।…

शांति और प्रेम का संदेश देती है बुद्ध पूर्णिमा

– मृत्युंजय दीक्षित वैशाख मास की पूर्णिमा का भारतीय संस्कृति व बौद्ध समाज में अद्वितीय स्थान है। न केवल बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले…

बालक के पूर्ण विकास का विज्ञान ‘बाल क्रीडा कर्म’

-डॉ प्रज्ञा शरद देशपांडे चौंसठ कलाओं में से एक और सबसे महत्त्वपूर्ण कला ‘बाल क्रीडा कर्म’ (बच्चों का खेल) है। बाल का अर्थ है- “बलति…

निर्भीक किशोर-ननी गोपाल

 – गोपाल माहेश्वरी कल्पना भी आज उसकी है भला संभव कहीं, यातना यमयातना से बढ़ शहीदों ने सही। “कितने साल के हो?” अंग्रेज़ न्यायाधीश क्रूर…

स्वतन्त्रता संग्राम में आर्य समाज की भूमिका

-डॉ. रवि प्रकाश भारत जब आजाद नहीं हुआ था उस समय देश में कई कुरीतियां और अन्य सामाजिक बुराइयाँ देश में फैली हुई थी। इन…

अंग्रेजों का न्यायपूर्ण शासन? – 2

– प्रशांत पोळ १८५७ के क्रांति युद्ध में अंग्रेजों की निर्दयता एक ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर ने ‘द टाइम्स’ में लिखा, “We have the power of…