सा विद्या या विमुक्तये
✍ विकास चौधरी माननीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के भारतीय शिक्षा पर विचारों से अवगत तब हुए, जब 20 अगस्त, 1985 को ससंद के पटल पर…
✍ पीजुस कान्ति बोस शिल्प, साहित्य, संस्कृति के महानतम एक दीपपुंज विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने जीवन में सुगंभीर पाठ के द्वारा, अपने मौलिक दर्शन के…
✍ सचिन अरुण जोशी आचार्य विनोबा भावे एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व। केवल चिंतन ही नहीं अपितु चिंतनाधारित कृति ऐसी उनकी प्रगल्भता थी। विनोबाजी मूलतः महाराष्ट्र से…
– रेखा चुड़ासमा मार्गरेट नोबल ब्रिटेन की प्रख्यात शिक्षाविद् ई.स. 1884 में मार्गरेट नोबल ने अपना शिक्षण व्यवसाय प्रारंभ किया, उसका परिचय पेस्टलोजी और फ्रोबेल…
– डॉ. राकेश दुबे दीनदयाल जी की दृष्टि में भारतीय शिक्षा विषय पर विचार करते हुए कुछ प्रश्न स्वभावत: मन में उठते हैं जैसे किसी…
– सतीश कुमार इक्कीसवीं शताब्दी में शिक्षा का जितना महत्व है, उससे ज्यादा उतना ही महत्व शिक्षा कहाँ से ग्रहण की जा रही हैं उसका…
– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और में इसे लेकर रहूँगा” की उद्घोषणा करने वाले तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों…
– शिव कुमार शर्मा शिक्षा मनुष्य का परिष्कार करती है। शिक्षा ही उसके गुणों का संवर्द्धन कर देवत्व की ओर प्रेरित करती है। किन्तु शिक्षा…
– डॉ. रवीन्द्र नाथ तिवारी स्वामी विवेकानन्द महान चिन्तक, दार्शनिक एवं भारतीय सनातन संस्कृति के पुरोधा थे। धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृति उन्हें विरासत में मिली…
– अवनीश भटनागर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरुजी कुशल संगठक होने के साथ-साथ समाज जीवन के…