✍ गोपाल माहेश्वरी प्राकृत अपनी सायकिल लेकर प्रातः से ही निकल पड़ा था। शीतलमंद पवन के झकोरे उसके तन मन में स्फूर्ति और आनंद का …
Category: कथा/कहानी
शिक्षा से सम्बंधित कहनियाँ
बेटा नहीं बेटी
✍ गोपाल माहेश्वरी निपुण शाला से लौट कर आया और मैदान में खेलने चला गया। कबड्डी और खो-खो उसकी मित्र मंडली के प्रिय खेल थे।…
साहस शील हृदय में भर दे
✍ गोपाल माहेश्वरी सत्येंद्र आठवीं कक्षा का बहुत प्रतिभाशाली विद्यार्थी है। आज उसकी वार्षिक परीक्षा का तीसरा प्रश्नपत्र था। उसने बहुत अच्छी पढ़ाई की थी…
समय का गणित
✍ गोपाल माहेश्वरी वैसे तो उसका नाम भास्कर था लेकिन मित्रों में वह गणितानंद के नाम से प्रसिद्ध हो चला था। कक्षा के अधिकांश बच्चे…
वैज्ञानिको भव
✍ गोपाल माहेश्वरी रघु और मधु दोनों गहरे मित्र संध्या समय कालोनी के बगीचे में बैठे थे। मंद शीतल पवन में वृक्ष और पौधे आनंद…
जन गण मन
✍ गोपाल माहेश्वरी “जन गण मन अधिनायक जय है भारत भाग्यविधाता” भारत का राष्ट्रगान, सामूहिक स्वरों में यह गीत वातावरण में एक विशेष चेतना भर…
अनमोल भूमि अमर बलिदान
राघव अभी केवल नौ वर्ष का था। प्रतिदिन अपने ताऊ जी और उनके बेटे माधव के साथ नियमित शाखा जाता। ताऊ जी ने आज बाल…
हमारा संविधान
– गोपाल माहेश्वरी “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीश तिहुँ लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनिपुत्र पवन सुत नामा।” विवेक की आवाज सारे घर…
राम की दीवाली
– गोपाल माहेश्वरी दीपावली का दिन था पर राम प्रातः से ही अनमना बैठा था। त्योहार था पर मन में उत्साह नहीं था। वस्तुतः कोरोनाकाल…
घर-घर तिरंगा – हर घर तिरंगा
– गोपाल महेश्वरी रोचक संयोग ही था कि भारत भूषण जी का जन्म भी पन्द्रह अगस्त 1947 को ही हुआ था और उनके पौत्री यानि…