– रवि कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है। संघ शक्ति का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। संघ…
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महात्मा ज्योतिबा फुले का शिक्षा दर्शन
– पांडुरंग कुलकर्णी विद्या बिना मति गयी ! मति बिना नीति गयी ! नीति बिना गती गयी ! गती बिना वित्त गया ! वित्त विना…
पालकों के समक्ष चुनौतियाँ और सुअवसर
– दिलीप वसंत बेतकेकर विवाह हुआ, पारिवारिक जीवन प्रारंभ हुआ, माता-पिता की श्रेणी में आ गये, अब शिकवा-शिकायत का कोई अर्थ नहीं होता। दिन-ब-दिन पालकों…
पाती बिटिया के नाम-23 (खामोशियों की मौत गंवारा नहीं है)
– डॉ विकास दवे खामोशियों की मौत गंवारा नहीं है मुझे शीशा हूँ टूट कर भी खनक छोड़ जाऊँगा प्रिय बिटिया! हिन्दू संस्कृति प्रारम्भ से…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-30 (मनोमय कोश का विकास)
– वासुदेव प्रजापति मनो ब्रह्मेति व्यजानात् आपके ध्यान में आया होगा कि एक ही कथा निरन्तर चल रही है। पुत्र भृगु अपने पिता वरुण के…
शिशु शिक्षा – 2 (वर्तमान अवधारणा एवं भारतीय अवधारणा)
– नम्रता दत्त जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने शिक्षा के संदर्भ में कहा – ‘सा विद्या या विमुक्तये’। ‘शिक्ष’ धातु से उत्पन्न शिक्षा का अर्थ है…
संकीर्तन संजीवनी से समाज को चेतन करने वाले : श्री चैतन्य महाप्रभु
– गोपाल महेश्वरी “चैतन्य देव का ज्ञान सौर-ज्ञान था, ज्ञानसूर्य का प्रकाश था और उनके भीतर भक्तिचन्द्र की शीतल किरणें भी थी। ब्रह्मज्ञान और भक्ति…
संत तुकाराम यांचे जीवन दर्शन
– सौ. प्रांजली अजय आफळे अणुरेणिया थोकडा । तुका आकाशाएवढा ।।१।। या ओळीतच संत तुकारामांचे सूक्ष्मातून प्रचंडाकडे जाणारे समग्र, विस्तृत व व्यापक व्यक्तिचित्र दडले आहे।…
संत तुकाराम का जीवन दर्शन
– सौ. प्रांजली अजय आफळे अणूरेणिया थोकडा तुका आकाशाएवढा ।।१।। अर्थात् कभी अणु की तरह सूक्ष्म संत तुकाराम गगन की तरह असीम हो गये हैं।…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-29 (प्राणमय कोश का विकास)
– वासुदेव प्रजापति प्राणों ब्रह्मेति व्यजानात् इससे पूर्व की कथा में पिता वरुण के कहने पर भृगु ने तप किया और तप करके जाना कि…