✍ दिलीप वसंत बेतकेकर क्या सदैव ‘नारायण नारायण’ जपते रहते हो, इस खंभे में है तेरा नारायण? गुस्से से लाल, तमतमाते चेहरे से हिरण्यकश्यप ने…
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स्वतंत्रता के सात दीवाने
✍ गोपाल माहेश्वरी राष्ट्रभक्ति जब छात्रशक्ति के हृदयों में फलने लगती है। पर्वत सी हो विकट चुनौती पत्ते सी हिलने लगती है।। स्वतंत्रता के आन्दोलनों…
भारतीय ज्ञान का खजाना-20 (भारतीय स्थापत्य शास्त्र भाग – दो)
✍ प्रशांत पोळ किसी भी वस्तु की वारंटी अथवा गारंटी का अनुमान, हम सामान्य लोग कितना लगा सकते हैं? एक वर्ष, दो वर्ष, पांच वर्ष…
शिशु का आहार-विहार
✍ रवि कुमार घर में शिशु रहता है तो आनन्द रहता है। घर में आने-जाने वाले सभी रिश्तेदार, ईष्ट-मित्र गण के लिए वह शिशु आकर्षण…
सावरकर का साहित्य धर्म – भाग २
✍ गोपाल माहेश्वरी सावरकर का सम्पूर्ण लेखन अपने राष्ट्र और समाज की दुर्दशा से विमुक्ति के लिए गहन संवेदना और निवारण के उत्कट संकल्पों…
सावरकर का साहित्य धर्म – भाग १
✍ गोपाल माहेश्वरी स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अर्वाचीन भारत के एक ऐसे विराट व्यक्तित्व हैं जिसके प्रत्येक आयाम को समन्वित रूप से देखें या…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 82 (अंग्रेजी शिक्षा की देन – बुद्धिविभ्रम)
✍ वासुदेव प्रजापति देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष बीत गए और हम अमृतकाल मना रहे हैं। इस अमृतकाल में कुछ ऐसे लोग भी मिल…
शिक्षा की निष्पत्ति – अखंड व्यक्तित्व का निर्माण
✍ आचार्य श्रीतुलसी जीवन जीना एक बात है और विशिष्ट जीवन जीना दूसरी बात है। ऐसा जीवन जो दुसरों के लिये उदाहरण बन सके, विशिष्ट…
ज्ञानात्मक जानकारी तो है पर व्यवहार में ???
✍ राजेन्द्र सिंह बघेल एक मासिक पत्रिका में छपे लेख में यह पढ़कर मन को प्रसन्नता हुई कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी हेतु नवयुवकों के…
बेटा नहीं बेटी
✍ गोपाल माहेश्वरी निपुण शाला से लौट कर आया और मैदान में खेलने चला गया। कबड्डी और खो-खो उसकी मित्र मंडली के प्रिय खेल थे।…