शिशु शिक्षा 40 – क्षमताओं का विकास – भाग 2

✍ नम्रता दत्त श्रृंखला के इस सोपान में शिशु की बौद्धिक क्षमताओं अर्थात् विज्ञानमयकोश  एवं आध्यात्मिक क्षमताओं अर्थात् आनन्दमयकोश के विकास पर संक्षिप्त चर्चा करेंगे।…

स्वयं दें मन को सूचना

✍ दिलीप वसंत बेतकेकर हम निरंतर बोलते रहते हैं- एक प्रकार से अन्य व्यक्ति के साथ जो तेज आवाज के साथ प्रक्रिया है। और दूसरे…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 85 (भारतीय परिवार परम्परा पर आघात)

 ✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिम की व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था का दुष्परिणाम भारतीय स्त्रियों पर सर्वाधिक हुआ। स्त्रियों पर हुए दुष्परिणामों का असर परिवार इकाई पर होना स्वाभाविक…

गुरु आश्रम की ओर

✍ गोपाल माहेश्वरी प्रातःकाल पाँच बजने को थे कि घर में खटर-पटर की आवाजों से गौरव की नींद टूट गई। उसे पता था दादा जी-…

साहस का पुतला – रमेशदत्त

✍ गोपाल माहेश्वरी खिल रहा हो फूल जीवन का उसे माँ को चढ़ा दो, जब तिरंगा थामना हो काम छोड़ो कर बढ़ा दो। प्रयागराज युगों-युगों…

नागार्जुन का साहित्यिक परिचय

✍ डॉ. मीरा कुमारी वैद्यनाथ मिश्र जो नागार्जुन के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनका जन्म 30 जून 1911 में उनके ननिहाल ‘सतलखा’ गाँव, मधुबनी जिले…

भारतीय ज्ञान का खजाना-21 (बाणस्तंभ)

✍ प्रशांत पोळ   ‘इतिहास’ बड़ा चमत्कारी विषय है। इसको खोजते खोजते हमारा सामना ऐसी स्थिति से होता है कि हम आश्चर्य में पड़ जाते…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 84 (व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था के दुष्परिणाम)

 ✍ वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा का पश्चिमीकरण जिन सिद्धांतों के आधार पर किया गया, उनमें “व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना” प्रमुख सिद्धांत है। व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना से…

शिशु शिक्षा 39 – क्षमताओं का विकास

✍ नम्रता दत्त   शिशु के जीवन के प्रारम्भ्कि पांच वर्ष सीखने की नींव के वर्ष होते हैं। पांच वर्ष की यह सीख/शिक्षा सम्पूर्ण जीवन…

नमस्ते वन देवता

✍ गोपाल माहेश्वरी प्राकृत अपनी सायकिल लेकर प्रातः से ही निकल पड़ा था। शीतलमंद पवन के झकोरे उसके तन मन में स्फूर्ति और आनंद का …