भारतीय परम्परागत खेल : बाल विकास का सशक्त माध्यम

  ✍ अवनीश भटनागर उत्साह, जोश, मस्ती तथा रोमांच से भरपूर खेलकूद बच्चों को तो क्या, बड़ों को भी पसन्द हैं। दुनियाँ के सभी देशों में…

15 अगस्त 1947 – तत्कालीन समाचार पत्रों के झरोखों से

 ✍  विनोद जौहरी भारतवर्ष के इतिहास में 15 अगस्त 1947 का दिन सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है जिसको हमने अपनी पाठ्य पुस्तकों और…

भारत विभाजन – त्रासदी, परिणाम व सावधानी

 ✍ राजेन्द्र सिंह बघेल   वे महान वीर आत्माएँ जो देश विभाजन के समय भयानक एवं विषम परिस्थितियों में फंसे अगणित निर्दोष लोगों की रक्षा…

चिंतन और चेतना

✍ गोपाल माहेश्वरी चिंतन और चेतना सगे भाई-बहिन हैं। नाम का प्रभाव उनके विचारों पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। पिताजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के…

सुनिए कान, मन, आंखों से’!

✍ दिलीप वसंत बेतकेकर धोंडोजी और गुंड्रोजी एक बार रास्ते में मिले, आपस में बातचीत होने लगी! धोंडोजी गुंडों जी से पूछने लगे- कहो गुंडों…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 87 (शिक्षा का बाजारीकरण)

 ✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश में शिक्षा, चिकित्सा तथा धर्म अनादि काल से सेवा के क्षेत्र रहे हैं। सेवा से हमारा तात्पर्य आज की भाँति…

दृढ़ निश्चयी बालाजी

✍ गोपाल माहेश्वरी चिंगारियाँ अंगार से जब आग लेकर छूटती हैं। बुझने से पहले वह समूचा वन जलाती लूटती हैं।। वह सारी रात जागा था…

भारतीय ज्ञान का खजाना-22 (लोहस्तंभ)

✍ प्रशांत पोळ दक्षिण दिल्ली से महरौली की दिशा में जाते समय दूर से ही हमें ‘कुतुब मीनार’ दिखने लगती है। 238 फीट ऊँची यह…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 86 (भौतिक आधार के दुष्परिणाम)

 ✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिमी जीवन विचार और भारतीय जीवन विचार में आधारभूत अन्तर है। जहाँ पश्चिम ने भौतिकता को आधार बनाया है, वहीं भारत ने…

लज्जाराम तोमर कृत पंचपदी शिक्षण पद्धति

✍ विपिन राठी शिक्षा ही वह आधारशिला है जिस पर खड़े होकर कोई राष्ट्र विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम हो सकता है। अतः किसी…