15 अगस्त 1947 – तत्कालीन समाचार पत्रों के झरोखों से

 ✍  विनोद जौहरी

भारतवर्ष के इतिहास में 15 अगस्त 1947 का दिन सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है जिसको हमने अपनी पाठ्य पुस्तकों और स्वतन्त्रता के संघर्ष में मुग़ल और ब्रिटिश आक्रांताओं से आज़ादी की लड़ाई लड़ते हुए हजारों बलिदानों की आहुति से सुना और समझा है। वर्ष 1947 से पूर्व के थोड़े बहुत समाचार पत्र बड़े साहस से सीमित संदेश समाज में भेजने में सफल होते थे और उन पर भी अंग्रेजों के बहुत अंकुश थे। स्वतंत्रता की लड़ाई में गिरफ्तार होने वाले स्वतन्त्रता सेनानियों की गिरफ्तारी, उनको सज़ा और फांसी के समाचारों के प्रकाशित होने पर भी ब्रिटिश सरकार का अंकुश था इसलिए भी हजारों गुमनाम बलिदानी सदा के लिए हमारी स्मृति से ही गुमनाम हो गए और वास्तविकता यह है कि हम कभी भी उनके बारे में नहीं जान पाएंगे।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के कालखंड में भारत को खंडित करके पाकिस्तान के गठन में विभाजन की विभीषिका बहुत भयानक है जिसका नाम मात्र भी उस समय के समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं हुआ, जिसके बहुत से कारण हो सकते हैं परंतु विभाजन के अत्याचार और लाखों हत्याओं की जानकारी पर आधारित यह शोध लेख है। अखंड भारत के पाकिस्तान क्षेत्र में स्थिति बहुत भयंकर थी और हिंदुओं पर, उनके मंदिरों पर लगातार हमले हो रहे थे और भारत के विभाजन की मांग करने वाले मुस्लिम लीग और अन्य संगठन मुहम्मद अली जिन्ना और अन्य नेताओं के नेतृत्व में कहर बरपाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे।

मात्र 15 अगस्त 1947 को इतिहास के तत्कालीन समाचार पत्रों के पन्नों में खंगालने का प्रयास किया और यथारूप में प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है। यह लेख केवल स्वतन्त्रता के आसपास के कालखंड तक सीमित है। सम्पूर्ण लेख को पढ़ने से ही समाचार को विस्तार से समझा जा सकता है, फिर भी संक्षेप में लिखने का प्रयास किया है।

  • दैनिक हिंदुस्तान के 21 जून 1947 के अंक के मुख प्रष्ठ पर प्रकाशित समाचार के अनुसार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट अटली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 तक भर्तियों को सत्ता सौंप देगा और उसी दिन लॉर्ड माउंटबेटन नए वाइसरॉय नियुक्त किए गए।
  • दैनिक हिंदुस्तान के ही 10 मार्च 1947 के अंक के मुख प्रष्ठ पर प्रकाशित समाचार के अनुसार (पंजाब प्रांत के रावलपिंडी में) तक्षशिला को जला कर राख कर दिया गया।
  • दैनिक हिंदुस्तान के 9 जून 1947 के अंक के मुख प्रष्ठ पर प्रकाशित समाचार के अनुसार महात्मा गांधी जी पूर्वी बंगाल की हिंसक घटनाओं से बहुत आहत थे और उन्होने बंगाल विभाजन का समर्थन किया। दैनिक हिंदुस्तान के 17 मई 1947 के अंक के पृष्ठ-6 पर प्रकाशित समाचार के अनुसार कांग्रेसी नेता पुरुषोत्तम दास टंडन ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि पाकिस्तान के हाथ गुलामी आएगी। ऐसी घोषणाएँ अन्य प्रतिष्ठित नेताओं ने भी की थीं।

  • इसी समाचार पत्र में काँग्रेस द्वारा भारत के विभाजन के प्रस्ताव में 157 और विरोध में 29 मत पड़े थे।
  • दैनिक हिंदुस्तान के 5 जुलाई 1947 के अंक के मुख प्रष्ठ पर समाचार “चालीस करोड़ भारतीयों की स्वतन्त्रता का बिल ब्रिटिश पार्लियामेंट में पेश” प्रकाशित हुआ। यह बिल ब्रिटिश पार्लियामेंट में प्रधान मंत्री एटली ने प्रस्तुत किया। इसी बिल में पूर्वी और पश्चिमी बंगाल का विभाजन भी हुआ। इस बिल के अनुसार भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र ‘उपनिवेशों’ की स्थापना की घोषणा की गयी। इन दो स्वतंत्र ‘उपनिवेशों’ के गवर्नर जनरल ब्रिटेन के सम्राट नियुक्त करेंगे। उस दिन प्रार्थना सभा में गांधीजी का प्रवचन हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि डॉमिनियन स्टेटस में राम राज्य पैदा होने के चिन्ह दिखाई नहीं देते।

  • दैनिक हिंदुस्तान के 25 जुलाई 1947 के अंक के मुख प्रष्ठ पर प्रकाशित समाचार के अनुसार घोषणा हुई कि श्री जवाहर लाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। वाइसरॉय 14 अगस्त की आधी रात को कार्यभार छोड़ देंगे। महात्मा गांधी ने वक्तव्य दिया कि अपने दिलों से हिंसा को निकाल दो नहीं तो भयानक रक्तपात होगा और उसमें हिंदुस्तान अपनी आज़ादी खो बेठेगा.. “और यदि हुई तो 1857 के बलवे से कहीं अधिक भयानक होगी”….।

  • दैनिक हिंदुस्तान के 8 अगस्त 1947 के अंक के मुख प्रष्ठ पर नयी दिल्ली के समाचार “राष्ट्रपिता गांधी का स्वयं प्रेरित नव बलिदान” प्रकाशित हुआ जिसके अनुसार “महात्मा गांधी के अपने जीवन का शेष भाग पाकिस्तान में बिताने के निश्चय से यहाँ के राजनैतिक क्षेत्रों में भरी तहलका मच गया है”। “महात्मा जी के, देश के मानस को हिला देने वाले अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रस्तुत निर्णय सबसे अधिक चौंका देने वाला है। स्वभावतः ही इससे महात्मा जी का यह वक्तव्य याद आ जाता है कि भारत के विभाजन को वह एक पाप मानते हैं और यह आशा फिर से जाग्रत ही उठती है कि अनतिदूर भविष्य में ही भारत का एकीकरण संभव हो सकता है”।

  • दिनांक 15 अगस्त 1947 को प्रकाशित समाचार “शताब्दियों की दासता के बाद स्वतन्त्रता का मंगल प्रभात” भारत के इतिहास का चिर स्मरणीय दिन है। रात के 12 बजे शंख ध्वनि के साथ स्वतन्त्रता की घोषणा की गयी। एक बॉक्स में हमारे देश के राष्ट्गान “वन्देमातरम ! सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम ….” का समाचार भी प्रकाशित हुआ। ऐसे समाचार अन्य समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुए। द गार्डियन

द डेली टेलीग्राफ

द हिंदु

  •  28 अक्तूबर 1947 को समाचार प्रकाशित हुआ कि कश्मीर रियासत भारतीय यूनियन में शामिल होगी। भारतीय फौजें कश्मीर पंहुच गईं और शेख अब्दुल्ला को अंतर्कालीन सरकार बनाने को निमंत्रित किया गया।

  • दैनिक हिंदुस्तान के 5.12.1947 में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित समाचार के अनुसार “21 नवंबर 1947 तक 80 लाख शरणार्थी भारत और पाकिस्तान की सीमा पार कर चुके थे जिन में 40 लाख हिंदु और सिख पश्चिम पंजाब, सीमाप्रान्त सिंध और बलोचिस्तान से आए थे और बाकी 5 या 6 लाख हिंदु और सिख मध्य दिसम्बर (1947) तक पश्चिमी पाकिस्तान से भारत आएंगे”।
  • दैनिक हिंदुस्तान के 12 दिसंबर 1947 के पृष्ठ 4 पर प्रकाशित समाचार के अनुसार सीमाप्रान्त को धोखे और हिंसा से पाकिस्तान में सम्मिलित किया गया। इसका विस्त्रत विवरण समाचार में उपलब्ध है।

  • दिनांक 13.12.1947 के समाचार पत्र (दैनिक हिंदुस्तान) में सरदार पटेल द्वारा भारत पाकिस्तान के समझौते की शर्तों की घोषणा की गयी जिसके अनुसार पाकिस्तान को 4 अरब शेष नकद में से 75 करोड़ मिलेगा और सैनिक सामग्री का एक तिहाई भाग पाकिस्तान को दिया जाएगा।

  • दैनिक हिंदुस्तान के 31.12.1947 के समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार नेहरू मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया जिसके द्वारा कश्मीर के युद्ध के प्रश्न प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भेजने का निश्चय किया गया।

भारत की स्वतन्त्रता के इतिहास को कितने ही ग्रन्थों में लिखा जा चुका है परंतु यथा रूप में यदि किसी भी कालखंड का कोई समाचार लिखने का प्रयास किया जाए तो भी हमारी भविष्य पीढ़ियाँ स्वतन्त्रता के इतिहास को सत्यता और सत्यनिष्ठा से समझ सकेंगी।

(लेखक सेवानिवृत अपर आयकर आयुक्त है।

और पढ़ें : भारत विभाजन – त्रासदी, परिणाम व सावधानी

Facebook Comments

One thought on “15 अगस्त 1947 – तत्कालीन समाचार पत्रों के झरोखों से

  1. भयावह इतिहास l हमें आपके लेख से सीख लेनी चाहिए l ये लेख बताता है कि, जो घटित हुआ वो छिपाया गया l

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *