✍ गोपाल माहेश्वरी जिस दिन शंकर का त्रिशूल भी चूक जाए संधानों से। उस दिन रुकने की आशा करना भारत संतानों से।। गीता कहती है…
Category: नवीनतम
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 102 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – अध्ययन और अनुसन्धान)
✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश के नाम ‘भारत’ में ही ज्ञान समाया हुआ है। भारत एक ऐसा देश है जो अपना सम्पूर्ण व्यवहार ज्ञान के…
धर्म व संविधान परस्पर विरोधी नहीं, अपितु पूरक हैं
✍ प्रणय कुमार लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका प्रहरी की होती है। व्यवस्था के सभी घटकों की निगरानी का दायित्व उस पर ही होता है।…
रामायण सत कोटि अपारा-3 (साहित्य जगत में राम का नाम)
✍ रवि कुमार बाईस जनवरी को अयोध्या जी में रामलला की मूर्ति स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा से सम्पूर्ण देश का जो वातावरण राममय हुआ, उसके…
प्रह्लाद की होली
✍ गोपाल माहेश्वरी रंगों का पर्व होली आते ही बच्चों के मन में बहुत ही उल्लास छाया हुआ था। रंग, गुलाल, पिचकारी की होड़ तो…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 101 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – भारतीय जीवनदृष्टि एवं शोधदृष्टि)
✍ वासुदेव प्रजापति किसी भी देश के वैचारिक क्षेत्र में जब अनवस्था होती है तब उसके सामाजिक जीवन में अव्यवस्थाएँ फैलती हैं। समाज में चिन्तन-मनन…
लोकनायक श्रीराम – ३
✍ प्रशांत पोळ मुनीश्रेष्ठ विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण चल रहे हैं। वें गंगा नदी पार कर, दक्षिण तट पर आते हैं। प्रवास पुनः…
पढ़ेंगे तभी बढ़ेंगे – १
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर वाचन अध्ययन का पहला पायदान है। अध्ययन की शुरुआत वाचन से ही होती है। आगे तो हम अनेक कौशल्य देखने वाले…
बाल बलिदानी रामचन्द्र
✍ गोपाल माहेश्वरी मातृ भू की पीर की करना पढ़ाई जानते थे। रक्त से जय मातृ भू की वे लिखाई जानते थे।। खाली समय में…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 100 (साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाना)
✍ वासुदेव प्रजापति गत अध्याय में हमने सामाजिक समरसता निर्माण करने के विषय में जाना। सामाजिक समरसता के समान ही दूसरा महत्वपूर्ण विषय साम्प्रदायिक सौहार्द…