हिंदुस्थान में रहने वाला हिन्दू है

✍️डॉ. बालाराम परमार

मैं भूगोल का विद्यार्थी और शिक्षक रहा हूँ। एक बार 11वीं कक्षा में ‘भारत की भौगोलिक स्थिति’ पाठ पढ़ाते समय जब मैंने मानचित्र पर गौर किया तो मेरे ध्यान में आया कि वास्तव में हिंदुस्तान की सही पहचान और परिभाषा तो यह है।

आप भारत के मानचित्र को देखिए। उत्तर में हिमालय हजारों किलोमीटर तक दीवार बनकर खड़ा है। जिसका विस्तार हिन्द कुश, पामीर के पठार से अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, तिब्बत, चीन, म्यांमार होता हुआ अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक फैला हुआ है। नीचे दक्षिण में देखो तो हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के साथ लहरा रहा है।

अब हम हिमालय का पहला अक्षर ‘हि’ लेते हैं, और हिंद महासागर का ‘न्दू’ लेते हैं। क्या बना? हि + न्दू = हिंदू।

अर्थात् हिमालय से लेकर हिंद महासागर के बीच का भू-भाग हिन्दुस्थान और यहां बसने वाले लोग हिंदू हैं। यह व्याख्या पहली बार मैंने 1994 में केंद्रीय विद्यालय पोर्ट ब्लेयर के छात्रों की कक्षा में की थी और बाद में 2020 तक भूगोल पढ़ाते समय छात्रों के बीच यह परिभाषा रखता रहा हूँ। मुझे इस शब्दावली पर मेरे विद्यार्थियों के साथ-साथ अनेक भूगोलवेत्ताओं का समर्थन भी मिला है।

मुझे लगता है ये विद्यमान शब्द कोष से ज्यादा सच्ची है, क्योंकि हिन्दुस्थान की जमीन के छोर से निकली है। सिंधु वाली कहानी तो अंग्रेजों ने बताई, पर हिमालय और हिंद महासागर वाली कहानी तो हमारे खून में है। जो हिमालय और हिन्द महासागर के घेरे में पैदा हुआ, पला-बढ़ा, वो भौगोलिक, सांस्कृतिक और जन्मस्थान की दृष्टि से हिंदू ही तो हुआ। फिर चाहे वो नमाज पढ़े या प्रार्थना करे। घर तो यही है ना?

दूसरा अनुभव : दीक्षा भूमि पर

मैं 1982 से 1991 तक लगातार धम्म चक्र परिवर्तन दिवस के अवसर पर नागपुर जाता रहा हूँ। बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को दीक्षाभूमि, नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया था। वहाँ एकत्रित होने वाले महार समाज के लोगों से बात करता था। अधिकांश कहने लगते थे – हम हिंदू नहीं, हम बौद्ध हैं।

ऐसा उत्तर आने पर मैं उनसे दो बातें पूछा करता था।

एक – भगवान बुद्ध का जन्म कहां हुआ था? लुंबिनी में, जो उस समय कपिलवस्तु राज्य था। उनके पिता का नाम क्या था? राजा शुद्धोधन। वो कौन थे? क्षत्रिय, इक्ष्वाकु वंश के। इक्ष्वाकु वंश किसका वंश है? भगवान राम का। तो बुद्ध किसके वंशज हुए? राम के।

दूसरा – बुद्ध ने जब पहला उपदेश दिया, तो किस भाषा में दिया? पालि में, जो संस्कृत की ही बेटी है। उन्होंने क्या कहा? “अप्प दीपो भव” – अपना दीपक स्वयं बनो। ये बात उपनिषदों में पहले से ही थी।

तो बुद्ध ने कोई नया धर्म नहीं बनाया, उन्होंने हिंदू धर्म की ही एक शाखा को साफ-सुथरा किया। जैसे एक घर में दो कमरे हों, एक में हवन होता है, दूसरे में ध्यान होता है।

बाबासाहेब आंबेडकर बहुत बड़े विद्वान थे, समाज सुधारक थे और संविधान सभा में मसौदा समिति के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने धर्म परिवर्तन किया क्योंकि उस समय हिंदू समाज में छुआछूत जैसी बुराई चरम पर थी। उनका क्रोधित होना सही था। पर क्रोध समाज की बुराई से था, राम-कृष्ण से नहीं।

आज कुछ भाई जो हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हैं, उनसे मैं हाथ जोड़कर कहता हूँ – भाई, जिस बुद्ध को आप मानते हो, वे स्वयं अपने जीवन के आखिरी समय तक हिंदू संस्कारों में ही रहे। आप बुद्ध को मानो, पर बुद्ध के दादा राम का अपमान मत करो। क्योंकि बुद्ध का खून हिंदू था, और आपका भी। धर्म बदलने से बाप नहीं बदलता।

तीसरा अनुभव : झाबुआ के आदिवासी

यह सोच सबसे ज्यादा दुख देने वाली है। कुछ महीनों पहले मैं झाबुआ जिले की पेटलावद जनपद में एक भील समाज के प्रतिष्ठित प्राचार्य के सेवानिवृत्त समारोह में गया था। वहां एक आदिवासी सरपंच बोले – हम प्रकृति पूजक हैं, हम हिंदू नहीं।

मैंने उनसे कहा – सरपंच साहब, आप किसकी पूजा करते हो? बोले – हम पेड़ की, पहाड़ की, नदी की और सूरज की।

मैंने कहा – यह उत्तर अपने आप में सबसे बड़े हिंदू होने का प्रमाण है। आपने कभी हिंदू धर्म के ग्रन्थ देखी हैं? वेद में सबसे पहला मंत्र किसका है? अग्नि का, वायु का, सूर्य का। ऋग्वेद का पहला शब्द ही है – “अग्निमीळे पुरोहितम्”।

सनातन धर्म ही कहता है – वृक्ष में देवता है, इसलिए तुलसी को माँ कहते हैं, पीपल में ब्रह्मा है। नदी में देवता है, इसलिए गंगा को माँ कहते हैं, नर्मदा को पुत्री कहते हैं। पहाड़ में देवता है, इसलिए गोवर्धन की पूजा करते हैं। सूरज देवता है, इसलिए सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाया जाता है।

दुनिया का कौन सा धर्म है जो प्रकृति को इतना मानता है? हिंदू धर्म ही कहता है – प्रकृति ही परमात्मा है। तो जो आदिवासी भाई पेड़ को, पहाड़ को, नदी को पूजता है, वो तो वेदों के सबसे निकट है। वो तो हम नगर वाले हिंदुओं से भी बड़ा हिंदू है।

अंत में,

देखिए, मैं कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति नहीं हूँ। गांव में पला-बढ़ा एक शिक्षक और जम्मू-कश्मीर से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त एक साधारण व्यक्ति हूँ।

देवास की जिस कॉलोनी में मैं रहता हूँ वहां 50% से अधिक जनसंख्या मुस्लिम भाइयों की है। विवाह के समय में जब मैं वर-वधु को हल्दी लगी देखता हूँ तो याद आ जाता है – हल्दी तो हिंदू परंपरा है ना? पर वो परंपरा उनके भी खून में है। जन्म और मृत्यु के संस्कारों में सभी धर्मों में बहुत समानता मिलती है।

इसलिए मैं कहता हूँ, जो हिमालय से हिंद महासागर के बीच रहता है, जो अपने पूर्वजों की भूमि को अपनी भूमि मानता है, जो पेड़ में, पहाड़ में, नदी में भगवान देखता है, जो राम के वंशज बुद्ध को अपना मानता है – वो हिंदू ही है। उसका नाम मोहम्मद हो सकता है, जॉन हो सकता है, प्रकाश हो सकता है। पर है वो हिंदू ही।

क्योंकि हिंदुस्तान में रहने वाला हिंदू ही तो कहलाएगा, पाकिस्तानी या यूरोपीय थोड़ी कहलाएगा?

(लेखक केंद्रीय विद्यालय संगठन से सेवा निवृत्त प्राचार्य है एवं विद्या भारती, मध्य क्षेत्र (मध्य प्रदेश -छत्तीसगढ़) एवं मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निर्माण एवं देखरेख स्थाई समिति, मध्य प्रदेश शासन के सदस्य है।)

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