विश्वहित का अनुसंधान यज्ञ

✍ गोपाल माहेश्वरी उनके सामने मिट्टी की दो मटकियां, एक बड़े से कटोरे जैसे पात्र में बारीक छनी हुई मिट्टी का गाढ़ा घोल और कपड़े…

इंद्र विद्यावाचस्पति की राष्ट्र को देन

 ✍ प्रोफेसर बाबूराम विश्व में जीवन यापन की दो दिशाएं हैं – 1. संस्कृतिमूल्क 2. सभ्यतामूलक। भारतवर्ष विश्व के प्राचीनतम देश की अपेक्षा राष्ट्र अधिक…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 99 (परिवार व समाज में समरसता लाना)

 ✍ वासुदेव प्रजापति पूर्व अध्याय में हमने हीनताबोध और उसका स्वरूप क्या है? यह समझा और उससे मुक्त होने के लिए मनोवैज्ञानिक उपाय करने की…

समय का मोल

✍ दिलीप वसंत बेतकेकर असीम विद्या, अल्प समय है झर झर ऐसा दौड़ेगा, वीर कितने हो न तुम, अंत तो आ ही जायेगा!! ये पंक्तियां…

डाकोर जी का शंकर

✍ गोपाल माहेश्वरी वीरों की गाथाएँ सुनकर वीरोचित मानस बनता है। मातृभूमि पर बलि होने का बच्चों में साहस ठनता है।। कहानियाँ तो प्रायः सभी…

लोकनायक श्रीराम – २

✍ प्रशांत पोळ सृष्टि के पालनकर्ता, सर्वव्यापी नारायण ने निर्णय लिया है, रावण जैसी आसुरी शक्ति के निर्दालन के लिए, ईश्वाकु कुल के वंशज, राजा…

रामायण सत कोटि अपारा-2 (‘रामलीला’ नाट्य मंचन का प्रभाव)

✍ रवि कुमार पौष शुक्ल द्वादशी, 22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से एक बार पुनः सारा देश राममय हो…

लोकनायक श्रीराम – १

✍ प्रशांत पोळ कालचक्र की गति तेज है। वह घूम रहा है। घूमते-घूमते पीछे जा रहा है। बहुत पीछे। इतिहास के पृष्ठ फड़फड़ाते हुए हमें…

डॉ. भगवानदास का शिक्षा-दर्शन

✍ डॉ. विकास कुमार पाठक शिक्षा, दर्शन, आध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी अनेक विभूतियों की धरती रही है। इसी धरती पर जन्में काशी के…

न्यायमूर्ती महादेव गोविंद रानडे

✍ हणमंत धोंडीराम गायकवाड भारत ही साधू संत व विचारवंताची भूमी आहे। या पवित्र भूमीत अनेक साधुसंतांचा व विचारवंतांचा जन्म झालेला आहे। त्यापैकीच न्यायमूर्ती महादेव…