विभाजनकालीन भारत के साक्षी

 – वासुदेव प्रजापति यह  परिचय है “विभाजनकालीन भारत के साक्षी” पुस्तक का। भारत विभाजन के विषय पर वैसे तो अनेक पुस्तकें लिखी गईं हैं, किन्तु…

राष्ट्र रक्षा का पर्व रक्षाबंधन

– वासुदेव प्रजापति भारतीय संस्कृति में व्रत, पर्व एवं उत्सवों का विशेष महत्व है। ये हमारी लौकिक और आध्यात्मिक उन्नति के सशक्त साधन हैं। इनसे…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 63 (मन की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति मन की शिक्षा से तात्पर्य है, सदाचार की शिक्षा, सद्गुणों की शिक्षा व चरित्र की शिक्षा। इन सबको मिलाकर एक ही शब्द…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 62 (तंत्रज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति विज्ञान की भांति तंत्र ज्ञान का भूत भी हमारे सिर पर चढ़कर बोल रहा है। यंत्रों के नये-नये आविष्कारों में हमें अपने…

हमारा सांस्कृतिक पर्व – गुरु पूर्णिमा

– वासुदेव प्रजापति   हमारे देश में वैसे तो प्रत्येक दिन किसी न किसी व्रत, पर्व या त्योहार के नाम से जाना जाता है, किन्तु…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 61 (विज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति आज का युग विज्ञान का युग माना जाता है। कुछ लोग तो आज के युग का देवता विज्ञान को ही मानते हैं।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 60 (सांस्कृतिक इतिहास)

 – वासुदेव प्रजापति हम इतिहास को राजकीय इतिहास के रूप में ही पढ़ाते हैं। सांस्कृतिक इतिहास भी होता है, इसका हमें भान ही नहीं है।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-59 (सांस्कृतिक अर्थशास्त्र, भाग-2)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक इस बिन्दु की स्पष्टता हुई होगी कि इकोनोमिक्स के सिद्धांतों पर चलने से सर्वजनहिताय व सर्वजनसुखाय का उद्देश्य सिद्ध नहीं…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 58 (सांस्कृतिक अर्थशास्त्र, भाग-1)

 – वासुदेव प्रजापति आज का युग आर्थिक युग है, यह सभी मानने लगे हैं। जीवन अर्थनिष्ठ बन गया है और अर्थ ने जीवन में केन्द्रवर्ती…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 57 (सांस्कृतिक समाजशास्त्र)

 – वासुदेव प्रजापति समाजशास्त्र एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य के साथ रहने की व्यवस्था का शास्त्र है। साथ-साथ रहने की व्यवस्था किन सिद्धान्तों पर हुई…