महान साहित्यकार प्रेमचन्द का साहित्य दर्शन भाग – 2

– कुलदीप मेहंदीरत्ता महात्मा गांधी के जीवन दर्शन से प्रभावित प्रेमचन्द : महात्मा गाँधी के प्रभाव से न केवल भारतीय बल्कि पाश्चत्य जगत के लेखक…

महान साहित्यकार प्रेमचन्द का साहित्य दर्शन भाग – 1

– डॉ० कुलदीप मेहंदीरत्ता   “साहित्यकार का काम केवल पाठकों का मन बहलाना नहीं है। यह तो भाटों और मदारियों, विदूषकों और मसखरों का ही…

ज्ञान की बात 38 (सृष्टिगत विकास)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने व्यष्टि और समष्टि के सम्बन्धों को जाना, आज हम सृष्टि के साथ व्यक्ति के सम्बन्धों को जानने का प्रयत्न…

भारतीय शिक्षा के मनीषी : श्री लज्जाराम तोमर

 – वासुदेव प्रजापति मा. लज्जारामजी तोमर की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में उनके शैक्षिक चिन्तन का पुण्य स्मरण करने हेतु यह लेख प्रस्तुत है। तोमरजी…

पाती बिटिया के नाम-30 (बाहुबली मस्तिष्क)

– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया, पढ़ाई के दौरान कई बार आप यह शिकायत करते पाए जाते हैं – “इतना सारा पाठ्यक्रम है हम क्या-क्या…

ज्ञान की बात 37 (विश्वगत विकास)

– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने व्यक्ति के परिवार के साथ सम्बन्ध, समाज के साथ सम्बन्ध, राष्ट्र के साथ सम्बन्ध कैसे होने चाहिए? इन सब…

पालक, पालय और पैसा

– दिलीप वसंत बेतकेकर “Money is a terrible master but an excellent servant.” “पैसा मालिक के रूप में भयानक है, परन्तु नौकर के रूप में…

पाती बिटिया के नाम-29 (दृढ़ निश्चय)

– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया, ‘भारत’ प्रारंभ से ही बड़ा शांतिप्रिय और गंभीर स्वभाव वाला बालक था। ‘ना काहु से दोस्ती, ना काहु से…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-36 (राष्ट्रगत विकास)

 – वासुदेव प्रजापति व्यष्टि और समष्टि के सम्बन्धों के अन्तर्गत हमने व्यक्ति और परिवार तथा व्यक्ति और समाज के सम्बन्धों को जाना। आज हम व्यक्ति…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-35 (समाजगत विकास)

 – वासुदेव प्रजापति इससे पूर्व हमने व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि व परमेष्ठी नामक चारों संज्ञाओं का अर्थ समझा। समष्टि के चार चरण – परिवार, समाज, राष्ट्र…