-डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता यह एक सर्वमान्य तथा सर्वस्वीकृत तथ्य है कि भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था। 1757 में प्लासी के युद्ध से…
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राष्ट्र रक्षा का पर्व रक्षाबंधन
– वासुदेव प्रजापति भारतीय संस्कृति में व्रत, पर्व एवं उत्सवों का विशेष महत्व है। ये हमारी लौकिक और आध्यात्मिक उन्नति के सशक्त साधन हैं। इनसे…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 63 (मन की शिक्षा)
– वासुदेव प्रजापति मन की शिक्षा से तात्पर्य है, सदाचार की शिक्षा, सद्गुणों की शिक्षा व चरित्र की शिक्षा। इन सबको मिलाकर एक ही शब्द…
1857 के स्वातंत्र्य समर पर साहित्य रचना
– रवि कुमार 1857 के स्वातंत्र्य समर के बारे में जिन्होंने अध्ययन किया है उनके सामने इस महान समर का उल्लेख आता है तो मन-मस्तिष्क…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 62 (तंत्रज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)
– वासुदेव प्रजापति विज्ञान की भांति तंत्र ज्ञान का भूत भी हमारे सिर पर चढ़कर बोल रहा है। यंत्रों के नये-नये आविष्कारों में हमें अपने…
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का शिक्षा दर्शन
– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और में इसे लेकर रहूँगा” की उद्घोषणा करने वाले तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों…
भोजन संस्कार का स्वास्थ्य पर प्रभाव
– रवि कुमार भोजन का भी एक संस्कार होता है। आजकल के भाग-दौड़ वाले जीवन में यह संस्कार धूमिल होता दिख रहा है। भोजन क्यों…
शिक्षक कक्षा या विषय के नहीं, विद्यार्थी के!
– अवनीश भटनागर गुरु पूर्णिमा महोत्सव है। प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को यह उत्सव मनाया जाता है। इसे उत्सव क्यों कहा जाए? क्योंकि…
हमारा सांस्कृतिक पर्व – गुरु पूर्णिमा
– वासुदेव प्रजापति हमारे देश में वैसे तो प्रत्येक दिन किसी न किसी व्रत, पर्व या त्योहार के नाम से जाना जाता है, किन्तु…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 61 (विज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)
– वासुदेव प्रजापति आज का युग विज्ञान का युग माना जाता है। कुछ लोग तो आज के युग का देवता विज्ञान को ही मानते हैं।…