भारतेंदु हरीशचन्द्र का साहित्य दर्शन

 – डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता भारतवर्ष के इतिहास में उन्नीसवीं सदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। 1600 ईस्वी के बाद धीरे-धीरे भारत को कब्जाते जा रहे अंग्रेजों…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 65 (शास्त्र की शिक्षा)

 –  वासुदेव प्रजापति जीवन में जितनी महत्त्वपूर्ण मन की शिक्षा और कर्म की शिक्षा है, उतनी ही महत्त्वपूर्ण शास्त्र की शिक्षा भी है। जहाँ मन…

स्वास्थ्य पर प्रकाश का प्रभाव

 – रवि कुमार एक पौधे को प्रकाश न मिले तो उसकी क्या स्थिति होती है? एक विद्यालय में कार्यक्रम के दौरान भेंट स्वरुप सुंदर गमले…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 64 (कर्म की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति जहाँ मन की शिक्षा व्यक्ति को सज्जन बनाती है, वहीं कर्म की शिक्षा व्यक्ति को कर्मशील बनाती है। व्यक्ति सज्जन है परन्तु…

विभाजनकालीन भारत के साक्षी

 – वासुदेव प्रजापति यह  परिचय है “विभाजनकालीन भारत के साक्षी” पुस्तक का। भारत विभाजन के विषय पर वैसे तो अनेक पुस्तकें लिखी गईं हैं, किन्तु…

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर शिक्षा की स्वतंत्रता

-डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता यह एक सर्वमान्य तथा सर्वस्वीकृत तथ्य है कि भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था। 1757 में प्लासी के युद्ध से…

राष्ट्र रक्षा का पर्व रक्षाबंधन

– वासुदेव प्रजापति भारतीय संस्कृति में व्रत, पर्व एवं उत्सवों का विशेष महत्व है। ये हमारी लौकिक और आध्यात्मिक उन्नति के सशक्त साधन हैं। इनसे…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 63 (मन की शिक्षा)

 – वासुदेव प्रजापति मन की शिक्षा से तात्पर्य है, सदाचार की शिक्षा, सद्गुणों की शिक्षा व चरित्र की शिक्षा। इन सबको मिलाकर एक ही शब्द…

1857 के स्वातंत्र्य समर पर साहित्य रचना

 – रवि कुमार 1857 के स्वातंत्र्य समर के बारे में जिन्होंने अध्ययन किया है उनके सामने इस महान समर का उल्लेख आता है तो मन-मस्तिष्क…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 62 (तंत्रज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति विज्ञान की भांति तंत्र ज्ञान का भूत भी हमारे सिर पर चढ़कर बोल रहा है। यंत्रों के नये-नये आविष्कारों में हमें अपने…