सा विद्या या विमुक्तये
– वासुदेव प्रजापति भारतीय समाज में आचार्य का स्थान अत्यन्त आदरणीय, पूजनीय एवं श्रेष्ठ माना गया है। सभी प्रकार के सत्तावान, बलवान और धनवान व्यक्तियों…
– प्रोफेसर बाबूराम किसी भी राष्ट्र की अस्मिता उसकी भाषा से होती है। भाषा संस्कृति को प्रभावित करती है और संस्कृति व दर्शन से प्रभावित…
निवेदिता (उपाध्यक्ष), विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी मूल अंग्रेजी – अनुवाद प्रा. सुधीर गर्ग, सोनीपत इस वर्ष 11 सितम्बर का दिन एक अति-विशेष दिन है क्योंकि 50…
अलकागौरी, जीवनव्रती, विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी आज से 50 वर्ष पूर्व इसी महीने में एक अद्भुत स्मारक का राष्ट्रार्पण हो रहा था। एक ऐसा स्मारक…
– वासुदेव प्रजापति “विद्यार्थी” शब्द विद्या और अर्थी इन दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है – विद्या(ज्ञान) प्राप्त करने वाला। अर्थात् जो…
किसी भी देश की प्रगति वहां की शिक्षा के ऊपर निर्भर करती है और शिक्षा की गुणवत्ता शिक्षक की गुणवत्ता पर आधारित है भारत विश्व…
– डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता भारतीय विचार और संस्कृति में आदर्श शिक्षक के स्वरुप की कल्पना की गई है। जगद्गुरु की उपाधि धारण करने वाले देश…
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने ज्ञानार्जन के करण, करणों का विकास, करणों की सक्रियता, ज्ञानार्जन प्रक्रिया तथा करण- उपकरण विवेक को समझा। आज हम…
– हरमिंदर सिंह मलिक श्री गुरुग्रन्थ साहिब परमात्मा का शाब्दिक स्वरूप है। मानवीय आदर्श मूल्यों का अथाह कोष है। गुरु ग्रन्थ साहिब प्रत्येक शब्द मनुष्यों…
– रवि कुमार 15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ न पूरी है।। उपरोक्त पंक्तियां…